दक्खिनी हिन्दी

दक्खिनी हिन्दी क्या है?


प्रदीप शर्मा खुसरो

शाब्दिक दृष्टि से दक्खिनी हिन्दी का अर्थ "दक्खिनी' अर्थात् दक्षिण की हिन्दी होता है, किन्तु इतना कह देने मात्र से ही इस भाषा का ठीक-ठाक बोध नहीं हो जाता। इसका पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त करने और इसे समझने के लिए विभिन्न विद्वानों के अभिमत जान लेना अपेक्षित होगा। गजेटियर आॅफ इंडिया में दकन में ले जायी गयी पुरानी हिन्दी को ही दक्खिनी कहा गया है। डॉ. ग्रियर्सन की मान्यता भी इसी के अनुरुप है। वे भी "दक्खिनी' को "हिन्दुस्तानी' का वह रुप मानते हैं जिसका प्रयोग दक्षिण (डेकेन) में रहने वाले मुसलमान लोग करते हैं। डॉ. उदयनारायण तिवारी ने दक्षिणी सम्बन्धी इसी स्वर को और पुष्टता प्रदान करते हुए लिखा है कि दक्खिनी हिन्दी दक्षिणी में ले जाई गई दिल्ली की बोली है जो बाद में अपने साहित्यिक रुप में दिल्ली में आकर फिर प्रतिष्ठित हो गई। विद्वानों की मान्यताओं के आधार पर दक्खिनी का उत्तर से ले जाया जाना तथा पुन: उसके द्वारा उत्तर की भाषाओं को व्यावहारिक और आदर्श रुप निर्धारित करने में सहायता प्रदान करना आदि बातें निश्चित हो चुकी हैं।

1. The form of old Hindi speech to Deccan came to be known as 'Dakhani' the speech of the suth The Gazetteer of India, Vol. I, 1865, P. 393
२. सर जार्ज ग्रियर्सन, भारत का भाषा सर्वेक्षण, खंड १, पृष्ठ ३०६
३. डॉ. उदयनारायण तिवारी, हिन्दी भाषा तथा साहित्य, पृष्ट १८

 


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