वाराणसी वैभव

भोजपुरी लोक साहित्य एवं संस्कृति


मुहाव

लोकोक्ति और मुहावरा में वही भेद है, जो र्रूप की दृष्टि से वाक्य और खण्डवाक्य में होता है। प्रयुक्त होने पर लोकोक्ति के र्रूप, काल, वचन, पुरुँष आदि में कोई परिवर्तन नहीं होता, किन्तु मुहाव में हो जाता है। जैसे - ""चा र्तृया घर रहे, चा र विदःेश'' (कहावत)। इनका प्रसंगात कहीं भी, किसी भी अवसर पर अपनी भावनाओं या मतों की पुष्टि में सीधा प्रयोग किया जा सकता है; लेकिन मुहाव को बिना वाक्य में ढाले उसका अर्थ स्पष्ट नहीं होता, जैसे - ""फूलल''ं। इसका प्रयोग कई र्रूपों में हो सकता है, यथा - "बड़ा फूलल बाड़े' (अर्थात् बहुत गुस्से में हैं, यहाँ प्रशंसा सुनकर सीना फुलाना भी अर्थ हो सकता है), "डूमरी के फूल होखल' (अर्थात् दःुर्लभ होना, बहुत दिन के बाद दिखाई पड़ना), "नदी फुलाइल बा' (अर्थात् नदी में बाढ़ आया है), "फूला बुतावल' (श्मशान में जले हुए शव के स्थान पर एक कर्मकाण्डीय विधान), "फूल के डुंम्भा होखल' (कुपित होना), इत्यादि। उपयोगिता की दृष्टि से मुहावरों का काम वाक्य में अर्थ चमत्कार उत्पन्न कर साधारण वाक्य को भी सशक्त, समृद्ध और ओजपूर्ण बनाना है। लक्षणा और व्यंजना पर अवलम्बित मुहाव किसी एक अलंकार में सीमित न रहकर तमाम तरह के अलंकारों की ध्वनि व्यंजित करते हैं। प्रस्तुत से अप्रस्तुत का निदःर्शन मुहावरों की अपनी एक खास विशेषता है।

१. अँतड़ी छ्रहर कइल - उपवास, पेट् सोन्हावल

२. अँतड़ी दःुहाइल - काफी श्रम

३. अंकवार लिहल - गले मिलना

४. अंगुरियावल - बार-बार उत्प्रेरित करना (अनावश्यक)

५. अंगुरी उठावल - शान के खिलाफ, विरोध

६. अंगुरी चिबावल - अफसोस करना

७. अंगुरी दःेखावल - दःबदःबा कायम करना

८. अंगुरी पर गिनल - गिने-चुने

९. अंगुरी भोंकल - दःगा दःेना

१०. अंगुरी रंगल - नखड़ा पर पालिश

११. अकल के कोल् - मूर्ख, मो बुद्धि वाला

१२. अकिल गायब होखल - बुद्धि काम न करना।

१३. अकिला फुआ - खुद ज्ञान न होना, दःूसरे को बुद्धि दःेना

१४. अकेला घर छ्केला मारल - उछाह एवं चिन्ता-रहित आनन्द

१५. अखर गइल - (पचास र्रूपया दःेवे के परल, अखर गइल)

१६. अगिया बैताल - क्रोध में पागल

१७. अछ्रंग लगावल - दःोषारोपण

१८. अड़ियल ट््ट् - जड़, जिदः्दी, जो बात न माने, विवेकहीन

१९. अथा माई के कथा कहल - निरर्थक बतकही

२०. अनका जूंजी मूतल - दःूस के बल पर कूदःना

२१. अनचलावल - बिना बुलाए

२२. अनबोलता काना - चुप्पा, जानबूझ कर न बोलन वाला

२३. अनूना दःेह में नून रगरल - निदःाष को दःोषी बताना

२४. अन्त ना पावल - असलियत का पता न लग पाना (इनकर अनत भगवानों ना पइ )

२५. अन्नखाती - कम खाने वाला, खाने से टालमटोल करने वाला

२६. अन्हार घर के दीया - कुलभूषण, आदःर्श गृहिणी, श्रेष्ठ संतान

२७. अन्हार होखल - कमजोरी, शक्तिक्षीणता

२८. अन्हारी का कइल - असंभव को सम्भव करना

२९. अपना राधा के याद कइल - अनुराग

३०. अबर पर जबर - एक से एकाल

३१. अमरख लागल - दःु:ख लगना (पइसा में छ्ेदः होखल)

३२. अरक बथुआ - खराब चीज

३३. अलखराज - निफिक्र, मस्त

३४. आँख आइल - दृष्टि दःोष

३५. आँख उठावल - खिलाफत

३६. आँख के किरकिरी - कष्टकारक, शत्रुता

३७. आँख के पानी गिरल - निर्लज्जता

३८. आँख तरेरल - क्रोध

३९. आँख दःेखावल - आतंक

४०. आँख ना ठहरल - विस्मय (कोई सुन्दःर, अनुपम चीज दःेखने पर)

४१. आँख मूनल - महट्यिावल, इशारा कइल

४२. आँख लगल - निद्रा

४३. आँख से करेज बहल - घोर दःु:ख, (गलि-गलि बहेला करेजवा, अँखियन कोर), गहरी चो

४४. आँखी में चनरमा लगावल- दृष्टि प्राप्त करना, आँख फाड़ कर दःेखना

४५. आँगन घर कईल - घरेलू कार्य

४६. आइ आम चा जाइ लबेदःा - चा जो हो

४७. आइना में मुँह दःेखल - स्वयं को पहचानना, अपनी स्थिति को बोध करना

४८. आकास छानल - व्यर्थ का कार्य

४९. आकास में उड़ल - कल्पना में विचरण, अलभ्य के लिए परिश्रम, मनसूबा बांधना

५०. आकास में दिया बारल - निष्फल कार्य, व्यर्थ काम

५१. आग लगा के तापल - दःुष्टता में प्रसन्नता, विनाश करने में खुशी

५२. आगी-पानी होखल - व्यग्र, बेचैन

५३. आगे के जामल - अबोध

५४. आटा दःाल के भाव मालूम होखल - कष्ट में यथार्थ का बोध

५५. आठे-का ना लागल - सहयोग न करना, समीप न आना

५६. आन पर कान कटावल- बात पर ड रहना

५७. आन्हा थोपी खेलावल - परेशान करना (एक प्रकार का खेली भी)

५८. आलू पर माट्ी चढ़ावल - समय बर्बादः करना

५९. आवाँ में नाद भुलाइल - स्पष्ट चीज भी न दःेख पाना

६०. इ कढ़ावेली त उ घोंटावेली - हाँ में हाँ मिलाना

६१. इनरा-पोखरा धइल - डूब मरना

६२. इमीली घोंटावल - कन्या विवाह के समय मामा द्वेारा किया गया विधान

६३. ईंटा जोरिया के बराबर होखल - खींच-खाच बरोबरी, समकक्ष होने की चेष्टा

६४. उच्च लिलार - भाग्यशाली

६५. उड़ान हरल - प्रगति में बिघ्न डालना

६६. उदःबेग लगावल - बेचैन करना

६७. उमिर छ्लकल - जवानी चढ़ना

६८. चिरइया उड़ गइल - जमाना बदःल गया, लद गया

६९. ऊँच सुनल - कम सुनना

७०. ऊँच-खाल गोड़ रखल - समझ-बूझकर काम न करना

७१. ऊँची छुवल - बेमन के काम

७२. ए कोठी के धान ओ कोठी कइल - व्यर्थ का काम, समय बर्बाद करना

७३. एक पइसा भी - तनिक भी (संदःेह न होना)

७४. एक बोलावे चौदःह धावे -

७५. एक लकड़िया बाजा - मृतक के साथ जाने वाला बाजा, (शंख, घरी-घंट्)

७६. एक हाथ के जीभ बढ़ावल - ज्या लालच करना

७७. एके लाठी से सबके हाँकल - सबको एक ही जैसा समझना

७८. एगो कौओ से भें ना - निर्जन

७९. एगो में गो जोरल - बात को बढ़ाना

८०. एड़ी अलगावल - बराबरी करना

८१. ओझाई कइल - किसी समस्या के समाधान हेतु गंभीर कोशिश

८२. ओठ खुलल - विस्मय

८३. ओठ चाट्ल - प्यास लगना, मँुह में पानी आना

८४. ओठ दःबावल - गुस्सा

८५. ओठ निकलल - निराशा

८६. ओठ पर फेंफरी - उदःासी

८७. ओठ फुट्ल - दःु:ख लगना

८८. ओठ बावल - अवाक्

८९. ओठ सट्ल - खामोशी, भूख-प्यास लगना

९०. ओठ हिलल - क्रोध

९१. ओल निकियावल - फिजूल कार्य

९२. केंट्यिा सोन्हावल - बदःले की भावना

९३. केंठी टूट्ल - धर्म का नाश, संकल्प टूट्ना, मछ्री खइला से साधु बाबा के केंठी टू गइल

९४. कउआ हँकनी बनावल - बेचैन किये रहना, इज्जत न दःेना

९५. कतराइल - बचना, पिण्ड छुड़ाना, मुँह मोड़ना

९६. कतल काट्ल - इज्जत उतारना, प्रतिष्ठा गिराना

९७. कनक भइल - नियंत्रण में न होना

९८. कनकट््टा - स्वतंत्र, जो अपने में किसी को न लगावे

९९. कनैठी - कान ऐंठना, सचेत करना

१००. कपार धूनल - सिर पिट्ना

१०१. कपार पर के लाठी - विपत्त

१०२. कपार पर चढ़ल - मन बढ़ना

१०३. कपा हाथे - चिंता

१०४. करजोरी - प्रार्थना

१०५. करम के दःमाद - काम कम, दिखावा अधिक

१०६. करम फूट्ल - दःुर्भाग्यशालिता

१०७. करम में आग लागल- विपत्ति, अभाग्य

१०८. करम में लेंढ़ा लिखाइल - दःुर्भाग्यशालिता की हद

१०९. करीखही हाँड़ी से मारल - बेशर्म, बदःचलन व्यक्ति का मान-मर्दःन करना

११०. करेजा काढ़ के दःेहल - दिल खोलकर मदःदः करना

१११. करेजा खंखोरल - भावनाओं का बेरहमी से दःोहन

११२. करेजा फाट्ल - अतिशय दःु:खी होना

११३. करेजा में लगल - दःु:ख होना, किसी बात की चो लगना

११४. कवन मुँह लेके जाएब - ऐसा काम जिसके प्रत्यक्ष होने पर शर्म लगे

११५. कसाई के कुत्ता - लालची पिछ्लग्गू

११६. काँची काढ़ल- पीट्ना, मारना

११७. काँचे नींद - पहली नीद

११८. काँन फूँकल - चेला बनाना

११९. कांची निकालल - आहिन करना, कूट्ना, पीट्ना

१२०. का से आँख भारी - सुकुवार

१२१. काठ मारल - होश गुम होना

१२२. कान उँखाड़ल - गलत रास्ते से बचाना

१२३. कान का के काढ़ल - बंधुआ बनाना

१२४. कान काट्ल - मात करना

१२५. कान खोल के सुनल - सावधान होकर सुनना

१२६. कान छुवल - सतर्क होना

१२७. कान छ्ेदःल - स्वाधीन बनना

१२८. कान दःूस जगह रखल - ध्यान न दःेना

१२९. कान दःेहल - ध्यान दःेना

१३०. कान धइल - भूल स्वीकार करना

१३१. कान ना कइल - ध्यान न दःेना

१३२. कान में अंगुरी लगावल - ध्यान हटाना

१३३. कान में तेल डाल के सुतल - बेफिक्र

१३४. काना-फूसी - गुप्त वार्ता

१३५. कानी बिलाई होखल - घास में छ्पिा साँप, ऊँपर सीधा भीतर कप

१३६. कानोकान - बिल्कुल गोपनीय

१३७. कान्ह दःेहल - सहयोग करना

१३८. कान्ह लगावल - सहारा दःेना

१३९. कान्हा भइंसा - मनब

१४०. काम चोखा भइल - कार्यसिद्धि

१४१. काल आइल - मृत्यु का समीप होना

१४२. काल निअराइल - मार खाने खाने वाला काम करना (तहार काल निअराइल बा)

१४३. काशी के फिरता - चालबाज

१४४. किचाइन कइल - छ्छालेदःर, नष्ट-भ्रष्ट, अस्त-व्यस्त करना

१४५. कुइयाँ उड़ाहल - उछाल, खुशी, कुँएं का पानी बाहर निकलना

१४६. कुकुर के मोल - कोई गणना नहीं, महत्वहीन, कोई मूल्य नहीं

१४७. कुकुर के सेना - जिसका खाय उसका गावे

१४८. कुकुर बिलार के जमघ - निकम्मे, गुणहीन लोगों की भीड़

१४९. कु खा के सुत जइतीं - दःु:ख के कारण मृत्युवरण की इच्छा

१५०. कुर्सी तोड़ल - कु काम न करना, बैठे रहना

१५१. कुहुक के रह गइल - दःु:ख प्रक न करना

१५२. कृत उतारल - प्रतिष्ठा का हनन करना, निम्न स्तर पर उतरना

१५३. केराव लेखा सुरका टांगल - अफशोस करना

१५४. कोख उठल- भरपे खाइल

१५५. कोख के बिहुन - नि:संतान

१५६. कोख धसल - प्रचण्ड भूख की स्थिति

१५७. कोख बइठल - वृद्ध होना

१५८. कोख भारी होखल - गर्भवती होना

१५९. कोल् के बैल होखल - दिन रात खट्ने वाला

१६०. कौआ कान ले गइल - आत्मचिन्तन न करना

१६१. कौड़ी के तीन होखल - कहीं का न होना, मूल्यहीन होना

१६२. कौड़ी में कसीदःा - छ्ोटा कार्य किन्तु अनावश्यक विस्तार

१६३. कौतुक उतारल - मजाक उड़ाना

१६४. खइला पर राखल - सिर्फ भोजन पर नौकर रखना

१६५. खइलो पर आफत - खाने पीने की भी तकलीफ

१६६. ख के आइल - परिश्रम करके आना

१६७. खदःार होखल - मुखिया बनना

१६८. खर जिउतिया कइल - संतान की भलाई के लिए माता द्वेारा किया गया कठिन तप

१६९. खरकट्ल छ्ोड़ावल - ऐंठन दःूर करना

१७०. खलरा खींचल - ठीक से पीट्ना

१७१. खसमें खेती - दःूस के भरोसे

१७२. खांच भरल - भोजन करना (उलाहना में)

१७३. खाई-बेलाई लागल - चैन नहीं

१७४. खाल खींचल - पीट्ना

१७५. खिलाड़ी होखल - चालाक बनना

१७६. खुरी काट्ल - बेचैन होना

१७७. खुले हाथ - उदःारतापूर्वक, घर लुटाई

१७८. खूंद बान्हल - हाबडीब, पाखण्ड करना

१७९. खेंखर बिलार के दःशा - दःयनीय दःशा

१८०. खेखर-बिलार के दःशा - बदःतर स्थिति

१८१. खेत उठल - खेत का फसल का लिया जाना, खेत खाली हो जाना

१८२. खेत-पे बराबर - खा-पी बराबर, बचत नहीं

१८३. खेप लागल - हल्का बोझ, फिर भी थक जाना, बैठ जाना

१८४. खेल कइल - मजाक करना, तमाशा खड़ा करना

१८५. खेल खेलावल - परेशान करना

१८६. खेलवाड़ कइल - मजाक करना

१८७. खैर ना होखल - बचने का उपाय नहीं

१८८. खोपचारा मारल - मन ब का मन ठीक करना, ऐसी बात कहना जिससे दःु:ख लगे

१८९. गंगा नहाइल - किसी विघ्न से मुक्ति

१९०. गंगा हेलल - झूठ पर पदःा डालना

१९१. गंगा होखल - उदःार

१९२. गठरकट््टा - उधरिया, पॉकेट्मार

१९३. गतान भिंगावल - मजा मारना

१९४. गतान होखल - थक कर चूर

१९५. गदःरन अइंठल - अहित करना

१९६. गदःरनिया पास - गर्दःन में हाथ लगाकर बाहर करना

१९७. गदःह पचीसी - मूर्खता

१९८. गदःहा के जनम छूट्ल - जिदःंगी में पहली बार किसी विशिष्ट चीज की प्राप्ति

१९९. गर के केंठी - झंझ का काम (अनावश्यक बंधन)

२००. गर के घंटा - जी का जंजाल

२०१. गर के ढ़ोल - बिना लाभ के किसी की प्रशंसा या भक्ति

२०२. गर के माला - ऐसा चीज, जिसे न चाहते हुए भी अपनाना या ढ्ोना पड़े

२०३. गर के मुअड़ी - परेशानी में डालने वाला काम या सामान

२०४. गर पकड़ल - पीछा न छ्ोड़ना

२०५. गरदःन के ढ्ोल - झंझट्, परेशानी

२०६. गरदःन के भइल - प्रिय होना

२०७. गरदःन मो होखल - दःौलतमंदः, घमण्डी

२०८. गरदःनिआवल - गर्दःन में हाथ लगाकर बाहर करना

२०९. गरदःा झारल - मन का एठन छुड़ाना

२१०. ग बान्हल - गले में भोजन का अंट्काना, थोड़े में संतोष

२११. गर्दःन काट्ल - सतावल

२१२. गाँठ पारल - प्रतिज्ञा, कसम

२१३. गाँठ बान्हल - प्रतिज्ञा करना, संकल्प

२१४. गाभी फेंकल - व्यंग्य करना

२१५. गाय के भइंसी में, भइंसी के गाय में - घालमेल

२१६. गाय लीलल - कसम खाना

२१७. गाल फुलावल - र्रूठना

२१८. गाल बजावल - ढ्ोंग रचना, पाखण्ड करना

२१९. गाल बजावल - पाखण्ड करना

२२०. गा़ेड फुट्हा होखल - पैर जलना, कठिन यात्रा

२२१. गिलौरी ट्पकल - बढ़चढ़ की बातें

२२२. गीत कढ़ावल - गीत शु करना

२२३. गीदःड़ कहनी - भयभीत करना, डराना

२२४. गुमान कइल - किसी बात का अमरख/दःु:ख लगना

२२५. गुमाने फाट्ल - अति घमण्ड

२२६. गेठरिआवल - हाथ में करना (बहका हुआ माल, अथवा मुफ्त का माल)

२२७. गोईंठा में घीव सुखावल - अपव्यय, जिसका कोई प्रतिफल न निकले

२२८. गोट्ी बइठल - काम बनना, मेल स्थापित होना

२२९. गोड़ अड़ावल - विघ्न उत्पन्न करना

२३०. गोड़ दःबावल - फुसलाना, खुशामत करना

२३१. गोड़ धरिया - जिसका कोई स्वाभिमान न हो

२३२. गोड़ पर गिरल - क्षमा माँगना

२३३. गोड़ परल - याचना करना

२३४. गोड़ परिया कइल - आरजू, विनती

२३५. गोड़ बढ़ावल - चलने की तैयारी, शुभारम्भ करना

२३६. गोड़ भारी भइल - गर्भवती होना

२३७. गोड़ भुइयाँ ना होखल - छामछूम, अधिक उत्साह, खुशी

२३८. गोड़ में तेल लगावल - आरजू, विनती

२३९. गोड़ रँगल - बेफिक्री, चिंता नहीं

२४०. गोड़ लागल - दःंडवत प्रणाम करना

२४१. गोड़ा टाही लागल - आने जाने वालों पर ध्यान रखना

२४२. गोड़े-गोड़े चलल - साथ-साथ चलना

२४३. गोद भरल - गर्भवती होना

२४४. गोद लेहल - अपना बनाना, अपनी संतान बनाना

२४५. गोदी में सुतावल- ऱ्हदःय के समीप रखना, ऱ्हदःय से लगाना

२४६. गोदी सुन भइल- नि:संतान होना

२४७. गोबर काढ़ल - सेवा ट्हल, आश्रित होना

२४८. गोबर गनेस - मूर्ख

२४९. गोबर ढ्ीला भइल - हदःस होना

२५०. घट्ले मने - पूरा मन से नहीं, बिना उत्साह के

२५१. घर आंगन कइल - घरेलू कार्यों का व्यवस्थापन

२५२. घर के दीया - सुपुत्र, सुपात्र

२५३. घर जोगावल - घरेलू व्यवस्था, इन्तजाम, दःेख-रेख

२५४. घर बइठल - बेरोजगारी

२५५. घर में आग लगावल - किसी को विपत्ति में डालना, परिवार में फू डालना

२५६. घर में मुसरी पट्पटाइल - निर्धनता

२५७. घर हँसावल - बदःनामी कराना

२५८. घिचिर-पिचिर - असमंजस

२५९. घिरनाल काट्ल - छ्ट्पटाहट्/बेचैनी

२६०. घींच-घांच के - किसी तरह

२६१. घीनाऽ दःेहल - गलत काम करना, जिससे प्रतिष्ठा का हनन हो

२६२. घीव ले चिकन - अच्छ्ी बात

२६३. घें सूखल - कमजोरी, परेशानी, प्यास लगना

२६४. घेरा डालल - बचाव का सभी मार्ग अवर्रूद्ध करना

२६५. घेरा परल - छापा

२६६. चइतार लागल - मँुह-पे चलना

२६७. चउकी तूड़ल - आलसी

२६८. चकचूक होखल - झगड़ा

२६९. चकवा-चकई भइल

२७०. चतुरबउक - भीतर का होशियार, जिसे लोग बुरबक समझते हैं।

२७१. चमार सियार के दःशा - दःुर्दिन

२७२. चल दःेहल - फलां चल दःेहले, मर गइले, माट्ी उठ गइल

२७३. चल दःेहल - मृत्यु

२७४. चलती चलावल - तानाशाही, अपना हुक्म चलाना

२७५. चलनी से पानी भरल - बिना अक्ल के काम

२७६. चहुआ न उठल - दःु:ख लगना

२७७. चांचर खेलल - (रात भर बहुरिया चाँचर खेलस, दिन में कौआ दःेख डेरास)

२७८. चाढ़ा उतरी कइल - किसी चीज को पाने के लिए अनेक लोगों का प्रयास

२७९. चार लाख के आदःमी - बहुत उत्तम व्यक्ति

२८०. चारा ना चलल - विशेष लाभ न होना, कोई उपाय नहीं

२८१. चारों हाथ से - पूरी उदःारता, उछाह से

२८२. चालू बनल - व्यर्थ का चालाक बनना

२८३. चिरकुटाही - केंजूसी, छुद्र व्यवहार

२८४. चीलर के चह तूरल - कुतर्क करना, बात का बतंगड़ बनाना, छ्ोट्ी-छ्ोट्ी बात को भी तूल दःेना

२८५. चुट्की दःेहल - खिल्ली उड़ावल

२८६. चुट्की बजावल - काम को आसान करना

२८७. चुट्की भर - बहुत थोड़ा

२८८. चुट्की लेहल - मजा लेना

२८९. चुल्हा जुटावल - पारिवारिक मेल-मिलाप

२९०. चुस्की लेहल - किसी को फरेब में डालकर मजा लेना

२९१. चूचूहिया बोलल - सुबह होना

२९२. चूल्लू भर पानी में डूबल - निर्लज्जता

२९३. चूल्हा बुताइल - भोजन का अभाव

२९४. चेहरा के पानी गिरल - बशर्म

२९५. चेहरा पर बा बजल - उदःासी, भूख-प्यास

२९६. छ्क्का छुड़ावल - हरा दःेना, विजित करना

२९७. छ्ठी के दःूध इयाद करावल - परेशान करना

२९८. छ्तीसा होखल - हम अपने छ्तीसा हईं, हमरा के जनि पढावऽ

२९९. छ्ह महीनवा - अबोध

३००. छाती उतान कइल - अनावश्यक बहादःुरी प्रदःर्शन

३०१. छाती काट्ल - मजा मारना

३०२. छाती कूट्ल - परेशान करना

३०३. छाती के बाती गिनाइल - दःुबला-पतला

३०४. छाती चीरल - विश्वास दिलाना

३०५. छाती जुड़ाइल - आनन्द

३०६. छाती ट्घरावल - बेमुरौवत काम लेना, दःबाव डालना

३०७. छाती ट्घरावल - होश ठिकाने लगाना

३०८. छाती दःेखावल - बहादःुरी का प्रदःर्शन

३०९. छाती धड़कल - भय

३१०. छाती धधकल - संशय, भयाक्रान्त

३११. छाती धरावल - दःूध पिलाना

३१२. छाती पर पथर रखल - संतोष, कठोर संयम/धैर्य

३१३. छाती पर मसाला दःरल - मान मर्दःन

३१४. छाती पर मूंग दःरल - राड़ कइल, घमंड चूर करना

३१५. छाती पीट्ल - हाय हाय

३१६. छाती फाट्ल - असंतोष में दःु:ख

३१७. छाती फूलल - किसी चीज को पाकर प्रसन्न होना

३१८. छाती मलल - अफशोस

३१९. छाती में मुक्का मारल - हाय हाय करना

३२०. छाती से लगावल - स्नेह

३२१. छान्ह ठेठावल - परेशान करना

३२२. छान्ह पगहा तुड़ावल - बेचैन होना

३२३. छान्ह पगहा तुरावल - बेचैन होना

३२४. छाल छ्ीलल - परेशान करना

३२५. छाल्ही बिछावल - खुशामद करना

३२६. छाव कइल - चोना करना, नखड़ा करना

३२७. छ्ीं काट्ल - तेजी से भागना

३२८. ई मुई होखल - लजाइल

३२९. छुलुक दःाल छुलुक भात - साधारण में भी थोड़ा

३३०. छ्ौ-पाँच बतिआवल - छ्ल-कपट्पूर्ण बात करना

३३१. छौंड़ा-छ्उड़ी के खेल - कठिन/गंभीर कार्य को साधारण समझना

३३२. जंगल के बात - लट््ठमार बोली

३३३. जग खानी घर - सुन्दःर, लिपा-पुता, साफ-सुथरा घर

३३४. जग हँसाई - बदःनामी

३३५. जड़ जीव - हठी

३३६. जम्ह के मातल - ताकत होने पर ऐंठकर चलना

३३७. जय गंगा - कसम

३३८. के अंगार होखल - क्रोध में पागल होना

३३९. जलवइया के छुवल - पिलपिलाह/मरियल लड़का

३४०. जहर उगिलल - तर्कहीन व तथ्यहीन दःोषारोपण

३४१. जहर के पूड़िया - अत्यन्त क्रोधी - बिखिआह

३४२. जांगर में घून लागल - निकम्मा आदःमी

३४३. जा के पूड़िया - (इ कनिया बिया कि जा के पूड़िया), गुणवंती

३४४. जान में जान आइल - संक से किसी तरह मुक्ति

३४५. जीभ खींचल - गं जुबान वाले को डाँट्ते हुए कहा जाता है- जबान संभाल के बोलऽ, नाहीं त तोहार जीभ खींच लेब

३४६. जीभ पर कन्ट्रोल कइल - सोच समझ कर बोलना

३४७. जेइ से कहलस काका, बूझ गइनी हँसुआ हेरवले बा - सुनते मातर/सुनते ही सँभल जाना, कथ्य का पूर्वानुमान

३४८. झँख मारल - पछ्तावा

३४९. झांकी पारल - दःेख-रेख करना

३५०. झांसा दःेहल - चकमा दःेना

३५१. झाईं मारल- दिखाई न पड़ना, बिना दःेखे चलना अथवा बिना सोचे-समझे काम करना

३५२. झाउली पट््ट्ी - फरेबी, गुमराह करना

३५३. झाड़ा पेसाब बन्द कईल - प्रतिबन्ध लगाना

३५४. झूठ के मुँह बसाइल - अत्यधिक झूठ बोलने पर

३५५. ट्भका मारल - व्यंग्य बोलना

३५६. टाँग अड़ावल - अवरोध डालन

३५७. टाँग पसार के सुतल - निफिकिर

३५८. ट्ें बेसाहल - झगड़ा मोलना

३५९. ट्ें बेसाहल - झगड़ा का जड़ रोपना

३६०. ठक से ना उपास पड़ल - बिल्कुल उपवास

३६१. ठकुआ मारल - भूल से कोई बात बिगड़ जाने पर

३६२. ठकुर सोहाती - हाँ में हाँ मिलाना

३६३. ठनगन गोपाल - द्रव्य रिक्तता

३६४. ठनठन गोपाल - रिक्त हस्त, अभाव

३६५. ठह तूरल - खूब परिश्रम करना

३६६. ठिकाना लगावल - (बुद्धि ठिकाने लगा दःेब), औकात बताना

३६७. ठीक कइल - होश में लाना (जबान संभाल के बोलऽ ना त ठीक कर दःेब)

३६८. ठेठाऽ दीहल - बूरी तरह पिटाई करना

३६९. डंका पीट्ल - हल्ला मचावल

३७०. डंके की चो पर - पू विश्वास के साथ

३७१. डगरा के बैगन होखल - ना इधर का ना उधर का, अस्थिर

३७२. डाँड़ चमकावल - अपने में किसी को न लगाना

३७३. डाँड़ टूट्ल - भारी नुकसान

३७४. डाँड़ी मारल - घ तौली, बेइमानी

३७५. डुंग्गी पीट्ल - प्रचार करना

३७६. डुंमरी के फूल होखल - दःुर्लभ होना

३७७. डुंमरी के फूल होखल - दःुर्लभ होना

३७८. डेढ़ अछ्री - कम पढ़ा लिखा

३७९. डोम घाउज कइल - अभावजनित असंतोषपूर्ण हल्ला

३८०. डोम होखल - नीच होना, छुद्र कार्य करना

३८१. डोमपाना कइल - नीचता प्रदःर्शन, नीच कर्म करना

३८२. डोमा डिगरी कइल - थूका -फजीहत

३८३. डोली फनावल - जबर्दःस्ती किसी दःूसरे की विवाहिता को अपने अधीन कर लेना

३८४. ढ्कचल पीली होखल - बेजान, रुँग्ण-कृषकाय

३८५. ढाका लेखां मुँह - बड़ा मुँह, हमेशा कु न कु मांगते रहने की आदःत

३८६. ढ्ंढ्ोरा पीट्ल - किसी बात को कहते फिरना, गंभीर न रहना

३८७. ढ्ीलल - बढ़ा चढ़ाकर बात करना

३८८. तर ऊँपर होखल - अगराइल

३८९. तरवा के लहर कपार पर चढ़ल - अत्यधिक क्रोध

३९०. तरवा चाट्ल - खुशामद करना, स्वार्थभक्ति

३९१. तरवा सुघरावल - पोल्हावल, मान मनौवल करना

३९२. तरवा से मसल दःेहल - तु समझना, अवकात में लाना

३९३. तरह डोलल - हिम्मत हारल

३९४. तरह डोलल - हिम्मत डोलना

३९५. तरहथी पर फोड़ा - विश्वासघात

३९६. तरेंगन गिनल - उपाय न सूझना, असहाय स्थिति

३९७. तसीहा दःेहल - दःु:ख दःेना

३९८. ताज बान्ह के घूमल - तिसमार खाँ बनना

३९९. तारकुन बारजुन होखल - राग-तान न मिलना, असंगत होना

४००. ताल ठोकल - बराबरी कइल, जोर अजमाइस के लिए ललकारना

४०१. तिरजी निकालल - छ्द्रिान्वेषण

४०२. तिरजी निकालल - बात बढ़ाना

४०३. तीन कउड़ी के होखल - कहीं का अथवा किसी काम का न होना

४०४. तीन में ना तेरह में - कहीं का नहीं

४०५. तीन-तेरह होना - बर्बाद होना

४०६. तेजी दःेखावल - शान गठना

४०७. तेरह-बाइस कइल - घालमेल, एक में दःो जोड़ना

४०८. तेल लगावल - खुशामद

४०९. तोर-मोर कइल - बात बढ़ावल

४१०. थरिया चमकल - खुशहाल जीवन

४११. थुथुन पर लाठी सहल - काफी धैर्य के साथ किसी के क शब्द को बदःास्त करना, आर्थिक संक से गुजरना

४१२. दःँत कट््टा - स्नेही, एक प्राण दःो दःेह

४१३. दःँतचिआर - हँसोड़, अनावश्यक हँसी हँसने वाला

४१४. दःँतरस - छ्ो शिशु की एक प्रकार की बीमारी

४१५. दःम लगावल, साँस लेहल - काम करते-करते थक जाने के बाद थोड़ा आराम करना

४१६. दःमी साधल - मत वैभिन्न होने पर चुप लगा जाना/गंभीर होना

४१७. दःरबार दिखावल - न्यायालय में भेजना

४१८. दःरबार लगावल - बैठकी, समर्थकों का मजमा, श्रेष्ठता का प्रदःर्शन

४१९. दःरिदःर से बैर - व्यर्थ झंझ में पड़ना

४२०. दःवाई कइल - मरम्मर करना, ठीक करना (बिगड़ैल व्यक्ति के संदःर्भ में)

४२१. दःहिना बाँह होखल - विश्वास पात्र होना

४२२. दःहिने बहल - किसी से पी न रहना

४२३. दःही के रही - अधिकई

४२४. दःाँत कोठ होखल - खट््टा, अतिप्रिय होना

४२५. दःाँत गिरल - बुढ़ापा आना

४२६. दःाँत चबावल - अफशोस करना

४२७. दःाँत चिआरल - याचना करना (स्वाभिमान को गिराकर)

४२८. दःाँत निकलल - प्रचार

४२९. दःाँत पीसल - खिसिआइल, क्रोध करना

४३०. दःाँत रंगल - बनऽल

४३१. दःाँत लागल - मूर्च्छि्त होना, होश उड़ना

४३२. दःाँते अंगुरी पकड़ल - अफशोस करना

४३३. दःाना पानी उठल - सेवा-मुक्ति, विदःा करना

४३४. दःाल के दःुलहिन - घी

४३५. दःाल-भात के कवर - किसी कठिन कार्य को सहज समझने का भ्रम

४३६. दःाल-भात में मूसर चन्द - बीच में बोलने वाला, बिना बुलाये बीच में ट्पकने वाला

४३७. दिजु़आ होखल - गाभिन/गर्भिणी होना, द्विेजत्व (श्रेष्ठता) को प्राप्त करना, पुनः उत्पन्न करना

४३८. दिन धइल - काम में आलस्य करना, टालना (इसका तात्पर्य तिथि निश्चित करना भी होता है, जैसे शादी-विवाह, विदःाई का दिन निश्चित करना)

४३९. दिन पातर होखल - गरीबी, अभावग्रस्त जीवन

४४०. दिने दिन फुलाइल - ओकर लइका अढ़उल के फूल लेखा दिने दिन फुलाइल जाता, हमार लड़का कपसल जाता।

४४१. दिया बुझल - मृत्यु होना

४४२. दिल दःरिआव - उछाल, उदःारता

४४३. दिशा फिरल - पैखाना, फारिग होना, निपटान

४४४. दीअर के बोध - बुद्धू, गँवार

४४५. दःुआरी के माट्ी कोड़ल, दःुआर खोनल - बकाये की वसूली के लिए दःरवाजे पर बार-बार आना

४४६. दःुआरी छ्ेंकल - रास्ता रोकना, किसी चीज के लिए हठ

४४७. दःुआ दःुआ माकल - बिना काम के भ्रमण

४४८. दःुखड़ा धनिया कइल - तकलीफ, रो-रो कर बेहाल होना

४४९. नाव पर पैर रखल - एक से अधिक धाराओं में बहना, बेमेल कार्यों/सिद्धान्तों को एक साथ साधने का बेमेल/प्रायः कठिन प्रयास

४५०. दःूध के धोवल - निष्कलंक (व्यंग्य में)

४५१. दःूध में पानी मिलावल - बेइमानी

४५२. दःूध लागल (करम लागल) - किसी मृत्यु होने पर एक श्राद्धकर्म

४५३. दःूधा के भात रिन्हाइल - मरन

४५४. दःूर कौड़ी के होखल - मूल्यवान, अलभ्य

४५५. दःेह खड़ा होखल - स्वस्थ होना

४५६. दःेह गिरल - अस्वस्थ, कमजोर होना

४५७. दःेह डोलल - काफी कमजोर

४५८. दःेह डोलावल - दःौड़-धूप, उद्यम करना

४५९. दःेह बइठल - थउसल, शरीर से लाचार होना

४६०. दःेह में आग लागल - अप्रिय, गलत बात सुनकर क्लेश होना

४६१. दःेह में सट्ल - अनुराग रखना, हेल-मेल रखना

४६२. दःेह लगुआर होखल - गर्भवती होना

४६३. दःोखड़ल - दःो खण्ड करना, खूब पीट्ना

४६४. दःोसरा के माथे खेलल पर माथे फरहार - दःूस के केंधे से बन्दःूक चलाना

४६५. दःोस्ती में कुस्ती - दःगाबाजी

४६६. दःौरी में डेग डालल - धीमी गति

४६७. धमिन पों - कायर

४६८. धरती के आस - अपनी हैसियत पर भरोसा

४६९. धरती ग होखल - परिस्थिति कठिन होना

४७०. धरती पर गोड़ ना होखल - उमंग

४७१. धोती खोंट्ल - लड़ने की तैयारी, झगड़ा-फसाद पर उता होना

४७२. धोवल धोबी - केंजूस

४७३. नकबइठा - नकचिपटा, नीचा

४७४. नकबासा - मोटा छ्द्रि

४७५. नकलोल पकड़ल- सिकेंजे में करना

४७६. नकवाहिन - तहस-नहस

४७७. नखड़ा कइल - हिल्ला हुज्जत (दिवावे में इनकार, मनौव्वल कराना)

४७८. नजर-गु - जोग-टोन

४७९. नजरियावल - कुदृष्टि डालना

४८०. नबाव के नाती - फुटानी उड़ाने वाला

४८१. नरकों में ठेला ठेली - कहीं सुख नहीं

४८२. नरी खींचल - दःेह से बेकार कइल

४८३. नव-छ्व (नव जानेली छ्व ना जानेली) - बात छुपाना, अबोध बनने का प्रयत्न

४८४. ना हिनुए में ना तुरुँके में - कहीं का नहीं

४८५. नाँव गाँव कइल - इज्जत लुटाना, बदःनामी कराना

४८६. नाक काट्ल - इज्जत लूट्ना

४८७. नाक के नकट्ी - बेकार, तु

४८८. नाक के नकबेसर होखल - प्रिय होना

४८९. नाक के बाल - अति प्रिय

४९०. नाक ना दःेहल - अति दःुर्गन्ध

४९१. नाक फरकावल - अस्वीकार (आक्रोश में)

४९२. नाक मूनल- घृणा करना

४९३. नाक सुरुँकल - अनमना (मन न लगाना)

४९४. नाक सेकुरावल - अनिच्छा, पसंद न करना

४९५. नाकोदःम कइल - परेशान करना

४९६. नागा न होखल - लगातार

४९७. नाच नचावल - परेशान करना

४९८. नाना गड़मड़वा सुन - कु न समझना

४९९. नाम पर कुत्ता पोसल - तौहीनी करना

५००. निछ्तरी आदःमी - प्रतापी, पुरुँषार्थी

५०१. निझारल बात - स्पष्ट बात

५०२. निरदःन - लापरवाह

५०३. नेटुआ के भात रीन्हल - नौ नौ दःुर्दःशा, कहीं का न रह जाना

५०४. पँवड़ के पावल - खूब दःेख सुनकर

५०५. पंथ में पाकड़ - मदःद करने वाला

५०६. पंॅवारा नाधल - किसी बात को अनावश्यक तूल दःेना, तिल का ताड़ बनाना

५०७. पइसा के मुंह फूट्ल - लक्ष्मी का आगमन

५०८. पइसा फेरल - जवाब दःेहल, जो काम लिया, वह न हो पाना

५०९. पकपकाइल - व्यर्थ का बकवास

५१०. पखेव फेंकल - मृत को किनारे लगाना

५११. पगड़ी उतारल - झुकाना, प्रतिष्ठा को गिराना

५१२. पचलत्ती बोलल - बहिष्कार करना

५१३. पट्री बइठल - मेल-जोल

५१४. पटुआइल - चुप लगा जाना, उत्साह हीनता

५१५. पत्तल चाट्ल - कुत्ते की दःशा, दःरिद्रता की दःशा

५१६. पनिगर - तेज (बैल पनिगर बा)

५१७. पपीहरा होखल - अतिशय परेशानी, बेचैनी

५१८. परतर कइल - दःेखादःेखी, बराबरी करना

५१९. परता परल - वाजिब लगना

५२०. परथाव दःेहल - दृष्टान्त दःेना

५२१. परलोक दःेखल - भला-बुरा का ख्याल

५२२. पसंगों में ना होखल - किसी तरह तुलना नहीं

५२३. पहाड़ा पढ़ावल - अधिक चालाक बनना, उल्लू बनाना, भरमाना

५२४. पहुँचा पकड़ल - हक अंदःाय वसूल करने के लिए किसी के इज्जत का ख्याल न करना

५२५. पाँख होखल - होशियार, समझदःार होना

५२६. पाँव पर - दः पर

५२७. पाँव पुजाई - दःक्षिणा

५२८. पाँव पूजल - सम्मान दःेना, श्रेष्ठ समझना

५२९. पाँव भरल - थक जाना

५३०. पाँव लागल - प्रणाम

५३१. पा दःेहल - टोना करना

५३२. पाद ढ्ेकार बन्द कइल - अधीन करना, स्वतंत्रता छ्ीनना

५३३. पानी उतरल - प्रतिष्ठा पर आँच, शमिर्ंदःगी

५३४. पानी उतारल - इज्जत गिराना

५३५. पानी के जगह खून बहावल - निष्ठापूर्वक नमक हलाली

५३६. पानी के बुलबुला - क्षणिक

५३७. पानी छानल - (निकसारी होने पर एक प्रकार टोट्रम)

५३८. पानी जोगावल - इज्जत रखना

५३९. पानी परल - घाटा, तहस-नहस

५४०. पानी पीट्ल - व्यर्थ का काम

५४१. पानी भरल - सेवा-ट्हल करना

५४२. पानी में आग लगावल - ज्यादःती, जोर जबर्दःस्ती

५४३. पानी में पड़ल - व्यर्थ, नुकसान

५४४. पानी में पथर गलल - असंभव को संभव करने का व्यर्थ प्रयास

५४५. पापड़ बेलल - झूठ साँच मिलावल

५४६. पाम्ह आइल - नौजवानी की पहली छाप

५४७. पार उतरल - सफल होना

५४८. पार न पावल - असफल प्रयास, सफल न होना

५४९. पारा चढ़ल - क्रोध चढ़ना

५५०. पाल खाइल - लंघाइल (गाय, भैंस)

५५१. पालिसी दःागल - व्यंग्य में खुशामद

५५२. पिंगल पढ़ल - मीठ वचन, मघुरी वाणी

५५३. पिण्ड छुड़ावल - हर्ज-मर्ज सहकर मुक्त होना

५५४. पीठ ठोकल - शाबासी दःेना

५५५. पीठ दःेखावल - मैदःान छ्ोड़ना, समपंण

५५६. पीठ दःेहल - मदःद दःेना

५५७. पीठ पर हाथ दःहल - सहायता करना

५५८. पीठ पी - आड़ में, अप्रत्यक्ष

५५९. पीठ पूजा - प्रशंसा, बाहबाही लूट्ना

५६०. पीठिया ठोक - समकक्ष

५६१. पीठी में धूर लगावल - छ्काना, पछाड़ना

५६२. पुतला जरावल - घोर विरोध, बेइज्जती

५६३. पुतला होखल - भोला भाला बनना

५६४. पुनिया कइल - बोहनी बाटा करना

५६५. पुर-पुर पादःल - डर, भय

५६६. पुरधाइन बनल - अपने मन होशियार, प्रधान बनना

५६७. पेंड़ा जोहल - इन्तजार करना

५६८. पे काट्ल - खान-पान में केंजूसी

५६९. पे के बात - गुप्त बात

५७०. पे गिरल - गर्भपात

५७१. पे जरावल - अधपेटा खाइल, अल्पाहार

५७२. पे ढ्ीला होखल - हदःस, भय

५७३. पे दःाग के सुतल - उपवास करना, भूखे रह जाना

५७४. पे दःेखावल - केंगाली का प्रदःर्शन

५७५. पे धोवल - गुप्त बात को जानने का प्रयास

५७६. पे निकलल - अधिक सुकुवार

५७७. पे पर रहल - भोजन पर रहना

५७८. पे पर लात मारल - जीविका छ्ीनना

५७९. पे पहाड़ भइल - भोजन के लिए परेशान

५८०. पे पातर होखल - पेट्झरी, गंभीर न रहना, कोई बात छुपा न पाना

५८१. पे पोछुआ लइका - अन्तिम संतान

५८२. पे पोसल - सिर्फ भोजन पर ही संतुष्ट

५८३. पे पोसुआ - जिसको अपने पे की ही चिन्ता हो