वाराणसी वैभव

भोजपुरी लोक साहित्य एवं संस्कृति


लोकगीत

चौथ चन्दःा गीत
सोहर
नवमी गीत
पराती
पितर नेवतौनी
विदःाई का गीत
फगुआ के गीत

चहका
जोगीरा
प्रश्नोत्तर में जोगीरा
चनाचूर गरम
वनिक
श्रमिक बोल
रजमतिया के चिट््ट्ी

रमजनिया का दःु:खड़ा
धोबी के गीत
मथुरा के लोगवा
मुरली
मति करऽ राम वियोग
मैं ना जीओं बिनु राम

चौथ चन्दःा गीत :

चौथ (भाद्र शुदी चौथ) के दिन गणेश-पूजा

स्कूली बच्चों द्वेारा गाया जाने वाला चौथ चंदःा गीत। भादःंसुदी चौथ को स्कूली बच्चे गुर्रूजी के साथ समूह में प्रत्येक विद्यार्थी के घर लकड़ा बजाते और इन गीतों को गाते हुए जाते हैं। विद्यार्थी के माता-पिता विदःाई में अन्न, वस्र और द्रव्य दःेते हैं, उसे लाकर स्कूल में जमा किया जाता है, वस्र गुर्रूजी को दिया जाता है; अन्न-द्रव्य से स्कूल में भोज का आयोजन होता है, जिसमें गुर्रूजी के साथ सभी बच्चे भाग लेते हैं। यह प्रथा अब गाँव के स्कूलों में दिखाई नहीं पड़ती।

१. खेलत खेलत एक कउड़ी पवनी

उ कउड़ी गंगा दःहवऽली

गंगा मुझको बालू दिया, उ बालू गोड़िनिया लिया।

गोड़िनिया मुझको भार दिया, उ भार घसवहा लिया।

घसवहा मुझको घास दिया, उ घास गैया लिया।

गइया मुझको दःूध दिया, उ दःूध बिलैया लिया।

बिलइया मुझको चूहा दिया, उ चूहा चिल्होरिया लिया।

चिल्होरिया मुझको पाँख दिया, उ पाँख राजा लिया।

राजा मुझको घोड़ा दिया।

 

२. रामजी चले लछुमनजी चले, महावीरजी चले, लंका दःाहन को।

तैंतीस कोट् प्रदःुम्न चले, जैसे मेघ चले बरिसावन को।

का करि उत्पात के नन्दःन, का करि तपसी दःोनों भइया।

मार दि उत्पात के नन्दःन, का दि तपसी दःोनों भइया।

 

३. सूर्यकुल वंशवा में जन्म लिहले रामचन्द्र,

कोशिला के कोख अवतार बटोहिया।

 

४. एक मती हरताल ताला, जहाँ पढ़ावे पंडित लाला।

पंडित लाला दिये असीस, जीओ बचवा लाख बरीस।

लाख बरीस की उमर पाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।

आव दिल्ली, आजम खाँव।

आजम खाँव चलाया तीर, बचा कोई रहा न वीर।

जहाँ के तीरे चौतीस पसरी,

जय बोलो जय रामा रघुवर, सीता मैया करे रसोइया

जेवें लछुमन रामा, ता के जूठन काठन पा गया हनुमाना।

सोने के गढ़ लंका ऊँपर कूद गया हनुमाना।

 

५. बबुआ हो बबुआ, सिताब लाल बबुआ

बबुआ के माई बड़ा हई दःानी,

लइकन के दःेख-दःेख भागे ली चुल्हानी।

घर में धोती टांगल बा,

बाकस में रुँपेया कूदःऽ ता

घर में धरबू चोर ले जाई

गुरुँजी के दःेबू, नाम हो जाई।

बबुआ आँख मुनौना भाई,

बिना किछु लेहले चललऽ ना जाई।

 

६. छाते थे भाई छाते थे,

छाते-छाते भूख लगी।

अनार की कलियाँ तोड़ लिया, बंगाली का छ्ोकड़ा दःेख लिया।

धर टाँग पट्क दिया, रोते-रोते घर गया।

घर का मालिक दःौड़ा आया, दिल्ली-कोस पुकारते आया।

आव रे दिल्ली-आजम खाँव, आजम खाँव चलाया तीर,

बचा कोई रहा न वीर।

थर-थर काँपे जमुनापुरी,

जमुनापुरी से आया वीर, मार गया दःो छ्ैला तीर।

छ्ैला मांगे एक छ्लाई, दिल्ली से गजमोती मंगाई।

 

७. एक दिन सतराजीत के भाई, पहँुचे वन में जाई।

वहाँ भादःो का बहार दिखलाए हुए थे

करते -करते शिकार, खुद बन गए शिकार

हाथी -घोड़ा से भी साज वे सजाए हुए थे।

सुनकर जामवन्त गुर्राया, उनको क्रोध और चढ़ि आया।

पहले बातों से बहलाए, वह शर्माए हुए था।

भारी होने लगी लड़ाई, जामवन्त को बात यादः जब आई

हमको दःर्शन दःेने आज रघुराई आए थे।

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सोहर

१. अंगना में कुइयाँ खोनाइले, पीयर माट्ी नू ए,

ए ललना जाहिरे जगव कवन दःेवा, नाती जनम लिहले हो।

नाती जनमले त भल भइले, अब वंस बाढ़ ए।

ए ललना दःेह घालऽ सोने के हँसुअवा,

बाबू के नार काट् ए।

ए ललना इ घालऽ सोने के खपड़वा,

बाबू के नहवाईवि ए।

ए ललना जा रे जगव कवन दःेवा,

नाती जनम लिहले ए ।

नाती जनमले त भल भइले, अब वंस बाढ़ ए ।

ए ललना ई घालऽ रेशमऽ के कपड़वा,

जे बाबू के पेनहाइवि ए ।

 

२. बबुआ बइठले नहाए त सासु निरेखेली ए,

ललना कवना चेली के लोभवलु त,

गरभ र जाले नू ए।

पुत मोरे बसेले अयोध्या, पतोहिया गजओबर ए,

ए सासु भंवरा सरीखे प्रभु अइले,

गरभ र जाले नू ए।

मो पिछुअरवा पट्ेहरवा भइया, तू मो हितवा नू ए,

बिनी द ना रेशमऽ के जलिया त,

छ्ैला के भोराइवि हे।

बिनि दःेहले रेशमऽ के जलिया, रेशम-डोरिया लगाई दःेहले ए

ले जाहु रेशम के जलिया, छ्ैला के भोरावऽहु ए ।

सुतल बाड़ू कि जागलऽ सासु,

चिन्ही लऽ आपनऽ पुतवा अछ्रंगवा मत लगावऽ ए। (अछ्रंगउदःोष)

 

३. जेठ बइसखवा के पुरइन लहर-लहर करे,

ता कोखी धिअवा जनमली त पुरुँख बेप परले ए। (बेपछ्उविपक्ष)

मइले ओढ़न, मइले डासन, कोदःो चउरा पंथ भइले,

रेंडवा के जरेला पसंगिया, निनरियो ना आवेले ए।

लाले ओढ़न, लाल डासन, बसमती चउरा पंथ भइले,

चनन के जरेला पसंगिया, निनरिया बलु आवेले ए।

सासु के दःेबऽ रेडिय तेल, ननद के तिसिए तेल,

गोतिन के दःेबऽ फुलेल तेल, हम गोतिन पाइंच ए।

सासु जे आवेली गावत, ननद बजावत हे,

गोतिन आवेली बिसमाधम मुदइया मो जनमऽलन,

सासु के डासबऽ खट्अवा, ननद के मचिअवा नू ए।

गोतिन के लाली पलंगिया हम गोतिन पाइंचए।

 

४. सोने के खरउआ राजा रामचन्द्र खुटुर-खुटुर चले नु ए।

चली गइले आमा के बोलावे-

चल ए आमा चल मोरा अंगना चल ए,

मोर धनि बेदःने-बेआकुल झँझिरिया धइले लोट्ेली हे।

नाहीं जाइब ए बबुआ नाहीं जाइब, तहरा अँगनवाँ नाहीं जाइब हे,

तहरा धनि बोलेली बिरहिया, सहल नाहीं जाला नु ए।

चल ए मामी चलहु, मो अंगना चल

मोर धनि बेदःने-बेआकुल झंझरिया धरी लोट्ेली हे।

नाहीं जाइब ए बबुआ नाहीं जाइब, तोर धनि बोलेली

बिरही कड़कवा, मो हिया लागेला हे।

महतारी, भाभी के बाद बहिन के पास गए और फिर अन्त में -

लोट् ए धनि लोट् झंझरिया धरी लोट् ए।

आमा के बोलेलू बिरहिया सहल नाहीं जाला नु ए।

बहिन , भाभी... के बोलेलू बिरहिया सहल नाहीं जाला नु ए।

नउजी अइहें सासु, नउजी अइ ननदःो, नउजी अइहें गोतिन, नउजी अइ हो (नउजीउचा न)

प्रभुजी ओढ़ि लेब ललका रजइया सउरिया हमी लिपबऽ नु ए। (ललका रजइयाउकफन)

घरी रात बितले पहर रात, अउरी छ्ने रात

ललना अधेराती होरिला जनमले, महलिया उ सोहर ए

मोरा पिछुअरवा बजनिया भैया, भैया धीरे-धीरे बजवा बजइह,

ननदःवा जनि जानस हे।

ललना सुनि लहली लउरी ननदिया, बेसरिया हम बधइया लेब हे, (लउरीउछ्ोट्ी)

सभवा बइठल बाबा बानी, सरब गुन आगर बानी हे, (बेसरियाउनकबेसर, नाक का एक आभूषण)

भउजो के भइले नन्दःलाल, बेसरिया हम बधइया लेब हे।

उहवाँ से बाबा उठि आवे ले, अंगना में ठारा भइले

बबुआ इ घालऽ नाक के बेसरिया दःुलारी धिअवा पाहुन हे। (फुफुतियाउफांड)

नाक में से कढ़ली बेसरिया फुफुतिया में चोरावेली

इ बेसरिया हमके बाबा दःहले, बधइया तोहके नाहीं दःेब हे।

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नवमी गीत :

१. हमरा शीतलऽ मइया बड़ दःुलरी, मइया बड़ दःुलरी

मइया डोला च आवेली हमार नगरी।

जाउ हम जनतीं अइ हमार नगरी (जाउउयदि)

मइया डगर बहरतीं दःहिनवें अंचरी।

 

२. नीमिया के डाढ़ मइया गावेली हिंडोलवा कि झूलि-झूलि ना।

झूलतऽ झूलतऽ मइया के लगली पिअसिया कि चलि भइली ना

मलहोरिया दःुआर, मइया चलि भइली ना

सुतल बाड़े कि जागल मलिया

बँूद एक आ के पनिया पिआव कि बूँद एक

कइसे में पनिया पिआईं मैया

कि बालका तोहार मो गोद

ले नाहि मालिनी बालका, सुताव सोने के खटोलवा कि बँूद एक

मोहिके पनिआ पिआव।

एक हाथ लेहली मालिन झँझ गड़ु़अवा

दःोस हाथ सिंहासन

जइसन मालिन हम जुड़वलू ओहिसन पतोहिया जुड़ास, धिअवा जुड़ास

धीया बाढ़ो ससुरे, पतोह बाढ़ो नइहर

मइया केकरा के दीले असीस।

धीया बाढ़ो ससुरा, पतोह बाढ़े नइहर

 

३. मइया के दःुआ हरियर पीपर

लाल धजा फहराई ए माया

मोहिनी भवानी जगतारन माया

अंचरा पसार भीख मांगेली बहुआरो ई

हमके सेनुरा भीख ई ए माया, मोहिनी भवानी

पटुका पसार भीख मांगेले कवन राम

हमके पुतवा भीख ई ए माया, मोहिनी भवानी...

 

४. कहाँ रहनी ए मइया कहाँ रहनी

मइया पकवल रोट्यिा सेराई गइले, रउरा चरन में,

उ रहनी उ असी कोस के पयेंतवा

चलतऽ बट्यिा बिलम लगले

कहाँ रहनी ए मइया....

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पराती :

१. हाथे लिहली खुरपी गड़ु़अवे जुड़ पानी

चलली मदःोदःर रानी दःावना छ्रिके पानी

टू गइले खुरपी, ढ्रकि गइले पानी

रोयेली मदःोदःर रानी, कवना छ्निारी के बेटा रहलन फुलवारी

हम ना जननी ए रनिया राउ फुलवारी

केकर घोड़वा माई ओएडें-गोएड़ें जाय

केकर धोड़वा माई सोझे दःउड़ल जाए

ससुर भसुर के घोड़वा ओएड़े-गोएड़े जाय

कवना दःुलहवा के घोड़वा माई सोझे उदःड़ल जाय

रोयेली कवन सुभई मटुकवे पों लोर

हँसेले कवन दःुलहा, मुँ खाले पान।

 

२. मोर पिछुअरवा घन बंसवरिया

कोइलर बोले अनबोल,

सुतल रजवा रे उठि के बइठऽले

पसिया के पकड़ लेइ आउ

हँकड़ -डँकड़हु गाँव-चकुदःरवा

राजा जी के परे ला हँकार ए

कि राजा मारबि कि डांड़बि कि नग्र से उजारबि ए

ना हम मारवि ना गरिआइबि

ना हम नग्र से उजारबिए।

जवना चिरइया के बोलिया सोहावन,

उ आनि दःे रे।

डा -डा पसिया लगुसी लगावे,

पाते -पाते कोइलर लुकासु रे,

जेहिसन पसिया लवले उदःबास, (उदःबासउबेचैनी)

मुओ तोर जेठका पूतऽ ए।

तहरा के दःेब चिरई सोने के पिंजड़वा

खोरन दःुधवा आहार रे।

जेहिसन पसिआ हमें जुड़वले

जिओ तोर जेठका पुतऽ रे।

 

३. हम तेहि पूछ्लिे सुरस गंगा, का रउआ छ्ोड़िले अरार हे।

पिया माछ्र मा ला बिन मलहवा,

ओ मोरा छ्ोड़िले अरार रे।

डालावा मउरिया लेके उत कवन समधी,

सोरहो सिंगार ले के उत कवन भसुर,

ओ मोरा ढ्बरल पानी।

 

४. ए जा रे जगव कवन दःेवा, जासु दःुहावन।

ए दःुधवा के चलेला दःहेंडिया त,

मठवा के नारी बहे।

ए हथवा के लिहली अरतिया त,

मुँह दःेखेली सोरही सनेही।

ए ज जगवहु कवन दःेही, जासु दःुहावन।

ए हथवा के लिहली अरतिया, त

सोरही सनेही आरती निरेखेली ए। जाहिरे...

 

५. आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मो अंगनवा हे,

दःेबऽ सतरजिया बिछाइ ए।

गाई के घीव धूम हूम कराइबि,

आकासे चली जास ए।

आईं ना बरहम बाबा, बइठीं मो अंगनवा हे।

दःेबऽ सतरजिया बिछाई ए।

गाई के गोबर ..

कब जग उगरिन होसु ए।

आईं ना काली माई, बइठीं मो अंगनवाँ हे,

दःेबऽ सतरजिया बिछाइ ए,

गाई के घीव धूम हम कराइबि,

कब जग उगरिन होसु हे।

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पितर नेवतौनी

१. ये सरगऽ में बसेले बर्हम बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।

ये सरगऽ में बसेले महादःेव बाबाऽ, उन्हउ के नेवतबि।

इसी तरह ठाकुर बाबा, सुरुँज, खिरलिच, काली, दःुर्गा, चन्द्रमा, अछ्ैब सभी दःेवता एवं उनकी पत्नी दःेवी का और सभी कीड़ों-मकोड़ों का भी आवाहन किया जाता है।

 

दःुआरी छ्ेंकौनी गीत

 

१. छ्ोड़ीं-छ्ोड़ीं सखी सबे रोकल दःुआर

मोर दःुलहा बाड़े लड़िका नादःान हे।

अहिरा के जात हंउअन बोली पतिशाह

कइसे में छ्ोड़ीं सखी रोकल दःुआर

तोर दःुलहा बाड़े सखी लड़िका नादःान हे।

 

दःुल् का उत्तर -

 

अहिरा के जात हईं बोली पतिशाह

का के बाबा तोर गइले पूजन रे।

का के भइया तोर गइले बोलावे रे।

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विदःाई का गीत

१. खेलत रहलीं सुपली मउनिया, आ गइले ससुरे न्यार।

बड़ा जतन से हम सिया जी के पोसलीं, सेहु रघुवर ले-ले जाय।

आपन भैया रहतन तऽ डोली लागल जइतन, बिनु भैया डोलिया उदःास।

के मोरा साजथिन पौती पोट्रिया, के मोरा दःेथिन धेनु गाय।

आमा मोरे साजथिन पावती पोट्रिया, बाबाजी दःेतथिन धेनु गाय।

केकरा रोअला से गंगा नदी ब गइलीं, केक जिअरा कठोर।

आमाजी के रोअला से गंगाजी ब गइलीं, भउजी के जिअरा कठोर।

गोर पर्रूँ पइयाँ पर्रूँ अगिल कहरवा, तनिक एक डोलिया बिलमाव।

मिली लेहु मिली ले संग के सहेलिया, फिर नाहीं होई मुलाकात।

सखिया -सलेहरा से मिली नाहीं पवलीं, डोलिया में दःेलऽ धकिआय।

र्तृया के तलैया हम नित उठ दःेखलीं, बाबा के तलैया छुट्ल जाय।

 

२. राजा हिंवंचल गृ गउरा जी जनमलीं, शिव लेहले अंगुरी धराय।

बसहा बयल पर डोली फनवले, बाघ छाल दिहलन ओढ़ाय।

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फगुआ के गीत :

१. धनि-धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।

लिखि लिखि चिठिया नारद मुनि भेजे, विश्वामित्र पिठायो।

साजि बरात चले राजा दःशरथ,

जनकपुरी चलि आयो, राम वर पायो।

वनविरदःा से बांस मंगायो, आनन माड़ो छ्वायो।

केंचन कलस धरतऽ बेदिअन परऽ,

जहाँ मानिक दीप जराए, राम वर पाए।

भए व्याह दःेव सब हरषत, सखि सब मंगल गाए,

राजा दःशरथ द्रव्य लुटाए, राम वर पाए।

धनि -धनि ए सिया रउरी भाग, राम वर पायो।

 

२. बारहमासा

शुभ कातिक सिर विचारी, तजो वनवारी।

जेठ मास तन तप्त अंग भावे नहीं सारी, तजो वनवारी।

बाढ़े विरह अषाढ़ दःेत अद्रा झंकारी, तजो वनवारी।

सावन सेज भयावन लागतऽ,

पिरतम बिनु बुन्द कटारी, तजो वनवारी।

भादःो गगन गंभीर पीर अति ऱ्हदःय मंझारी,

क के क्वार करार सौत संग फेंसे मुरारी, तजो वनवारी।

कातिव रास रचे मनमोहन,

द्विेज पाव में पायल भारी, तजो वनवारी।

अगहन अपित अनेक विकल वृषभानु दःुलारी,

पूस लगे तन जाड़ दःेत कुबजा को गारी।

आवत माघ बसंत जनावत, झूमर चौतार झमारी, तजो वनवारी।

फागुन उड़त गुलाब अर्गला कुमकुम जारी,

न भावत बिनु केंत चैत विरहा जल जारी,

दिन छुट्कन वैसाख जनावत, ऐसे काम न करहु विहारी, तजो वनवारी।

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चहका

३. सिया डाले राम गले जय माला, सिया डाले राम गले जय माला।

रामचन्द्र दःुलहा बनि आए। दःुलहा बनि आए, दःुलहा बनि आए।

आ लछुमन होऽऽ, बने सोहबाला, सिया डाले...

 

४. केदःली बन भौंरा रस माते, के दःली बन भौंरा रस माते।

केकरा गृहे जन्मे सिया जानकी, अ केकरा हो,

केकरा गृह में पारवती, केदःली बन भौंरा रस माते।

केइएँ विवाही सिया जानकी,

केइएँ विवाही पारबती, केदःली बन भौंरा रस माते।

राजा जनक गृहे सिया जानकी, अ राजा होऽऽ,

राजा हिवंचल के पारबती, केदःली बन भौंरा रस माते।

 

५. वर दःऽ हो भवानी, इ मगन हम मांगी ले।

रामचन्द्र ऐसो कंत, लखन ऐसो दःेवर ाानी, इहे मंगन...

राजा दःसरथ ऐसो सुसर, सास कोसिल्या रानी, इ मंगन...

राजा अयोध्या सरजुग जल निर्मल पानी, इहे मंगन...

 

६. तनि भ दःऽ गगरियाऽ हो श्याम क बृजनारि।

हमसे चढ़ा जात ना मोहन, जमुना ऊँच अरारी,

पाव धरत हमरो जीउ डरऽवत,

दःूजे पाव में पायल भारी, क बृजनारि।

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जोगीरा :

१. दःानापुर दःरियाव किनारा, गोलघर निशानी

ला साहेब ने किला बनाया, क्या गंगा जल पानी

जोगी जी वाह वाह, जोगी जी सार रा रा।

दिल्ली दःेखो ढाका दःेखो, शहर दःेखो कलकत्ता।

एक पेड़ तो ऐसा दःेखो, फर के ऊँपर पत्ता,

जोगाी जी वाह वाह, जोगी जी सार रा रा।

कौन काठ के बनी खड़ौआ, कौन यार बनाया है,

कौन गु की सेवा कीन्हो, कौन खड़ौआ पाया,

चनन काठ के बनी खड़ौआ, बढ़यी यार बनाया हो,

हम गु की सेवा कीन्हा, हम खड़ौआ पाया है,

जागी जी वाह वाह, जोगी जी सारा रा रा।

 

२. किसके बेटा राजा रावण किसके बेटा बाली

किसके बेटा हनुमान जी जे लंका जारी, फिर दःेख चली जा।

किसकी बेट्ी तारा मंदःोदःरी किसकी बेट्ी सीता?

किसके बेटा राम-लछुमन चित्रकू पर जीता?

किसके मारे अर्जुन मर गए किसके मा भीम?

किसके मारे बालि मर गये, कहाँ रहा सुग्रीव?

 

उत्तर -

 

१. विसेश्रवा के राजा रावण बाणासुर का बाली

पवन के बेटा हनुमान जी, ओ लंका के जारी

 

२. कृष्ण मारे आर्जुन मर गए कृष्ण के मा भीम

राम के मारे बालि मर गए लड़ता था सुग्रीव।

 

३. कौन जिला का रहने वाला, क्या बस्ती का नाम?

कौन जात का छ्ोकड़ा बता तो अपना नाम? फिर दःेख चली जा।

धरती माँ का जनम बता दःो, कौन दःेव का ट्ीका

कौन गु का सेवा किया, कहाँ जोगीरा सीखा? फिर दःेख चली जा।

क्या चीज का रेल बना है, क्या चीज का पहिया?

क्या चीज का ट्किट् बना है, क्या चीज का रुँपैया? फिर दःेख चली जा।

 

४. कौन दःेस से राजा आया कौन दःेस से रानी?

कौन दःेस से जोगी आया मारा उलटा बानी? फिर दःेख चली जा।

का खातिर राजा र्रूसा का खातिर रानी?

का खातिर जोगी र्रूसा का मारा बानी? फिर दःेख चली जा।

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प्रश्नोत्तर में जोगीरा :

मित्रो भेदः बताओ महावीर उस लंका के,

जो दःहन किया गढ़ लंका के ना।

कवन बात पर महावीर ने भेष बनाया बन्दःर का?

कितना लम्बा कितना चौड़ा पानी रहा समुन्दःर का?

पूरब पच्छ्मि उत्तर दःक्खिन था पहाड़ दःशकन्धर का?

कौन तरफ से गये महावीर, भेद जो पाये अन्दःर का?

विभीषण से मुलाकात हुआ कब, दिन रहा कि रात?

जाकर बजा दिया ओ डंका जो दःहन किया गढ़ लंका का।

कै मिन के अन्दःर पकड़ा महावीर बलवान को?

कौन दःूत ने खबर दिया था, जाकर सभा में रावन को?

उसी दःूत का नाम बता दःो, आज सभा में धावन को।

परी रहा कि दःेव रहा, कि था लड़का उ ब्राह्मन का?

पँू में कपड़ा कौन लपेटा, था किस निस्चर का बेटा?

फूंका घर वो पहले किसका, महावीर ने जाकर के?

नर -नारी सब जले थे कितने बताओ तू गा करके?

रहा कौन समय ओ बेरा, उसने पूं कै दःफे फेरा?

गुजरा कै दिन शंका का, जो दःहन किया गढ़ लंका का।

गो काले म थे कितने, बिगे गये उठा करके?

हिसाब करके जरा बता दःो आज हमें समझा करके।

किस जंगल की थी वो लकड़ी गदःा बना बलधारी का?

उस बढ़ई का नाम बताओ काम किया मिनकारी का?

वजन बता दःो उस गदःा का महावीर बलधारी का।

क शिवनन्दःन खोलो भेदः, दिल से हटाकर संका का।

जो दःहन किया था लंका का।

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चनाचूर गरम :

मेरा चना बना है तर, खाते बड़े-बड़े अफसर,

बै कुरसी के ऊँपर, कलम खींचे सरासर, चनाचूर गरम।

मेरा चना बना है चूर, खाते बड़े-बड़े मजदःूर, चनाचूर गरम।

मेरा चने की दःुकान, रखते झोली में दःुकान,

धरते विश्वनाथ का ध्यान, करते गंगा-स्नान, चनाचूर गरम।

मेरा चना बना है आला, इसमें विविध मसाला डाला,

खाने वाला है निराला, चना चूर गरम।

मेरा चना बना है हीर, खाते हनुमत बांकाबीर,

कुद गए सात समंदःर तीर, जाके सिया धरायो धीर, चनाचूर गरम।

मेरा चना जो कोई खावे, पानी नौ लोटा पी जावे,

रोट्ी नौ जोड़ा खा जावे, जाके कुस्ती में जमावे, चनाचूर गरम।

मेरा चना बना है गोल, रंडी बै चूची खोल,

जिनकी एक चवन्नी मोल, मैं तो दिया अट््ठन्नी खोल, चनाचूर गरम।

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वनिक :

मैं हँू साहुकारा नाथ, कीजिए हमारा सौदःा,

छ्ोट्ी बड़ी इलायची, छुहड़ा घर भरा है।

लवंग ओ सुपारी, कत्था केवरा सुवास भरो,

बांका है मुनक्का, जो डब्बे में रक्खा है।

किसमिस बादःाम, ओ चिरंजी तमाम रक्खी,

गड़ी का है गोला साँचे का सा ढ़ला है।

सोंठ जीरा जायफल डिब्बे में कपूर दःेखो,

काली मीर्च पीपली चालान नयी आयी है।

हरदी हरीत के ठंई भी ढ्ेर रक्खी,

धनिया मसाला सब आला दःरसाई है।

क अभिलाख लाल लीजिए मखाना पिस्ता,

दीजिए न दःाम, दःास चरणों पर पड़ा है।

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श्रमिक बोल :

(भार उठाते या ठेलते समय)

१. बोली-बोलऽ, चोली खोलऽ, चोली के भीतर, लाल कबूतर, खाए के मांगे, सबुज दःाना, धर-धर लेइयें पर, पां मोटा, खइबऽ सोटा, धर धरेसी, ध के पेसी, पेसन वाला, है मतवाला, ढ्लिवा भैया, क ढ्लिाई, ओकर मउगी, क सगाई।

२. हाथ भरो जी - हैसा, जोर करो जी - हैसा, जोर जुगुती - हैसा, हो छुट््ट्ी - हैसा, छुट््ट्ी होना - हैसा, मौज उड़ाना - हैसा, मौजेदःारी - हैसा, साव मदःारी - हैसा, घाम-घमैला- हैसा।

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रजमतिया के चिट््ट्ी :

१. छ्ोट्की गोतिनिया के तनवा के बतिया,

पतिया रोई-रोई ना, लिखावे रजमतिया।

सोस्ती श्री चिट््ट्ी रउरा भेजनी तेमे लिखल,

सो पचे अस्सी रोपेया, भेजनी तवन मिलल

ओतना से नाही कट्ी, भारी बा बिपतिया। पतिया...

छ्ोट्की के झूला फाट्ल, जेठकी के नाहीं,

बिट्यिा सेयान भइल, ओकरो लूगा चाही,

अबगे धरत बाट्े कोंहड़ा में बतिया, पतिया ...

रोज -रोज मंगरा मदःरसा जाला,

एक दिन तुरले र मौलवी के ताला,

ओकरा भेंटाइल बा करीमना संघतिया। पतिया...

पां जी के जोड़ा बैला गइलेसऽ बिकाइ,

मेलवा में गइले त पिलवा भुलाइल,

चार डं मरले मंगर्रू, भाग गइल बेकतिया। पतिया...

जाड़ा के महीना बा, रजाई लेम सिआइ,

जाड़ावा से मर गइल दःुरपतिया के माई,

बड़ा जोर बीमार बा भिखारी काका के नतिया। पतिया...

कबरी बकरिया रात-भर मेंमिआइल,

छ्ोट्का पठरुँआ लिखीं कतना में बिकाई,

दःुखवा के परले खिंचत बानी जँतिया। पतिया...

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रमजनिया का दःु:खड़ा -

रोई-रोई कहतिया बुढ़िया रमजनिया,

का कहीं ए बाबा आपन दःुख के कहनियाँ।

जेठवा बेट्उआ के कइनी सगाई,

अइसन बिआ मिलल दःुलहिनिया भेटाइल,

खट्यिा पर पानी ध के माँगे ले भोजनिया। का कहीं...

कबो उहो घरवा में झाड़ू ना लगावे,

दिनभर भतरा के मँुहवे निहारे,

भत के किरिया खाले मोर दःुलहिनिया। का कहीं...

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धोबी के गीत :

कवना पोखरवा में झिलमिल पनिया कि कवना पोखरवा सेवार,

कवना पोखरवा में चेल्हवा मछ्रिया कि केहो बिगे महाजाल।

राम पोखरवा में झिलमिल पनिया कि लछुमन पोखरवा सेवार,

सीता पोखरवा में चेल्हवा मछ्रिया कि रावन फेंके महाजाल।

लाल घोड़वा पर लाल च अइले कि उ घोड़वा भगवान,

सोने पलकिया में सीता च अइली कि चँवर डोलावे हनुमान।

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मथुरा के लोगवा :

आवत है नन्दःलाल के हाथी, तूरत डार मीरोरत छाती,

ए नन्दःलाल धका जनि दीहऽ धुक्की जनि दीहऽ।

मथुराजी के लोगवा बड़ा रगरी, फेरत है सिर के गगरी,

भींजत है लहँगा चुनरी, बान्हत है ट्ेढ़का पगरी।

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मुरली :

हमार मुरली भइल बा चोरी, मुरलिया दिलाइ दःऽ ए भाई।

सूतल रहलीं कदःम के छ्ैयां धर बंसी सिरहानी,

एतने में आ गइल निदिया बैरी, हो गइल मुरली के हानी,

मुरलिया दिलाइ दःऽ ए भाई।

ओ मुरली में प्राण बसल बा छ्छ्न जिअरवा मोरी,

जैसे हम हईं तोहरो दःुलरुँआ ओइसहीं मुरलिया मोरी,

मुरलिया दिखलाइ दःऽ ए भाई।

(राजाराम सहनी, सोनपुर)

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मति करऽ राम वियोग

मति करऽ राम वियोग सिया हो, मति करऽ राम वियोग।

सुतल रहनी केंचन भवन में, सपना दःेखली अनमोल।

सिया हो मति करऽ राम वियोग।

अमृत फल के बाग उजरले राम लखन के दःूत।

सिया हो मति करऽ राम वियोग।

पूरी अयोध्या से दःोउ बालक अइले, एक सांवर एक गोर।

सिया हो मति करऽ राम वियोग।

बाग उजरले लंक जरवले, दिहले समुंदःर बोर।

सिया हो मति करऽ राम वियोग।

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मैं ना जीओं बिनु राम

मैं ना जीओं बिनु राम हो जननी, मैं ना जिओं बिनु राम।

राम जइ संग हम जाएब,

अवध अइ कवन काम जननी हो, मैं ना जीओं बिनु राम।

राम लखन दःुनो वन के गवनकिन,

नृपति गयो सुरधाम, मैं न जीओं बिनु राम।

भूख लगी तहाँ भोजन बनैहों, प्यास लगी त पानी

नींद लगी तहँ सेज लगैहों, चरण दःबैहों सुबह-साम,

मैं न जीओ बिनु राम।



वाराणसी वैभव

 


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