वाराणसी वैभव

भोजपुरी लोक साहित्य एवं संस्कृति


व्यंजनामूलक शब्द

पक्षी-संबन्धी
पशु संबन्धी
कीड़े-मकोड़े- संबन्धी

गाय के प्रकार
मछ्ली के नाम
मछ्ली पकड़ने के उपकरण
कछुए के प्रकार

शब्दः-संरचना
वस्तु-स्थान
उपमान शब्द
अपशब्दः/उलाहना
आशीर्वाद / अभिवादःन
अविधामूलक सामासिक शब्द

आभूषण
गले से ऊँपर का
बाँह एवं हाथ का आभूषण
कमर के नीचे का आभूषण
गहना बनाने वाला सामान

सोनारी भाषा
साधुक्कड़ी भाषा

वस्तुनाम
पक्षियों के नाम
सपं

हर-फार

धान के प्रकार
अन्य तरह के अन्न
सब्जी
भोज्य एवं पेय
आम की प्रजाति
आम की अवस्था

बाँस की प्रजाति
लकड़ी सम्बन्धी शब्दःावली

घर
बर्तन
दिन चर्या
वाद्य-नृत्य

नौका के विषय में
नदी में बहने वाला सामान

जातियाँ
मल्लाहों की जाति
अहीरों की जाति
ना कद के व्यक्ति के लिए

बीमारियों के नाम
कुश्ती के दःाँव-पेच
बैल-गाड़ी में प्रयुक्त सामान

पौध नर्सरी सम्बन्धी
केला के पौध हेतु

पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, कीट्-पतंग आदि छ्ोट्े-बड़े समस्त प्राणियों का मानव-जीवन से गह संबन्ध का मूल कारण है सृष्टि का सबकुछ् उपयोगी होना। मनुष्य अपनी इच्छाओं, कामनाओं एवं आवश्यकताओं के अनुरुँप अपना सम्बन्ध विस्तृत करता है। इन प्राणियों के चरित्र के साथ मानव अपने चरित्र का तादःात्म्य स्थापित कर उनके समीप जाना चाहता है। इनके चरित्र से हमा काव्य दःर्शन एवं आध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को भी जन सामान्य तक पहुँचाने में काफी सहायता मिली है। "मानस' में काक-भुशुण्डी संवादः में भक्ति-आन्दःोलन का पूरा इतिहास समाहित है; पंचतंत्र, हितोपदःेश, बुद्ध की जातक कथाओं आदि में पशु-पक्षी पात्रांे का रोचक-अर्थपूर्ण वर्णन मिलता है। इन जीवों से मनुष्य का सदियों से रागात्मक संबन्ध रहा है। चन्द्र-चकोर में अपलक प्रेम की तन्मयता, राजहंस का नीर-क्षीर विवेक, स्वातिबूंद के लिए प्यासे चातक की आतुरता, पपी का "पी कहाँ' में विरहिणी की मर्मभेदी व्याकुलता, चक्रवाक में संयोग की विवशता, गर्रूड़ में विषधर पर विजय प्राप्त करने की अद्भुत क्षमता आदि भावों से हमारे साहित्य रचे-बसे हैं। मनुष्य ने इन प्राणियों को अपने दःोस्त एवं दःुश्मन दःोनो र्रूपों में पहचाना है। साथ ही अपने स्वभाव एवं चरित्र को उनके स्वभाव एवं चरित्र से जोड़ कर दःेखा है। इस प्रकार का सूक्ष्म अनुभव कम पढ़े-लिखे या अपढ़ ग्रमीण समाज में भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध और लोक-भाषिक या अनुभव परम्परा में प्रवाहमान हैं।

एक प्रखर बुद्धि संपन्न समाज किसी विषय, वस्तु या व्यक्ति को जितने ही करीब एवं सूक्ष्मता से दःेखता है, उसे उतनी ही विशेषताओं का दःर्शन होता है। इन विशेषताओं को शब्दःों में ढालने पर उसकी शब्द संपदःा भी बढ़ती है। जब हम किसी वस्तु, विषय या व्यक्ति की तुलना अन्य से करते हैं, तब भी ज्ञान के विकास के साथ-साथ नवीन शब्दःों का संज्ञान होते-चलता है। ऐसे ही कु अनुभव जन्य प्रतीक नीचे दिये जा र हैं।

पक्षी-संबन्धी

उल्लू - मूर्ख के लिए

उरुँआ - मंद बुद्धि वालों के लिए

कुचकुचवा - आँख मिचमिचा कर दःेखने वालों के लिए

कोयल - मधुर भाषी के लिए

खिरलिच - लयबद्ध तीब्र जाल के लिए

गवरा - प्यारा मासूम बच्चा के लिए

गीध - अभक्ष्य भोजन करने वालों के लिए

धाटो-बिलारो - समूहबद्ध होकर उमंग में गीत गाते जा रही स्रियों के लिए

चकवा-चकई - परेशान जिंदःगी की दःशायें

चुचुहिया का बोलना - सुबह का संकेत

मूर्गा का बोलना - भोर, भिनुसार होने का संकेत

चिल्होर - तह में छुपे सामान को भी ढूँ लेने वाली दृष्टि वालों के लिए

चोंचा - झगड़ालू, चर-भर करने वाली औरतों के लिए

चमगादःड़ - असभ्य, नंग-धडंग रहने वालों के लिए

चाही - किसी चीज को झप लेने की नीयत से दृष्टि गड़ाए व्यक्ति के लिए

पपीहरा - भूखा-प्यासा, असहाय, लुट्े हुए व्यक्ति के लिए

फुरगुद्दुी - चंचल-स्फुर्त व्यक्ति के लिए

बगुला - केन्द्रित हो मन से ध्यान लगाने वाले व्यक्ति के लिए

बुलबुल - प्रसन्न-खुश, चहचहाते व्यक्ति के लिए

बाझ - आतंक जमाने वाले, झपट््टा मारकर कु झट्क लेने की नीयत रखने वाले व्यक्ति के लिए

भुचंग - अति श्याम वर्ण व्यक्ति के लिए - "करिया-भुचेंग'

मैना - मधुर वाणी बोलने या गीत गाने वाली स्रियों के लिए

महोखा - लड़ाकू प्रवृत्ति, या किसी का कु हड़प लेने की नीयत वालों के लिए

सुग्गा - रट्ंत-बुद्धि वालों के लिए

डूमर - इर्दः-गि खड़ा होकर चहलकदःमी मचाने वालों के लिए

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पशु संबन्धी

गाय - सीधा, सरल, सहनशील, विनम्र और स्वभाव से ही किसी का अहित न सोंचने वाले व्यक्ति के लिए

भैंस - असभ्य रहन-सहन, अल्हड़, आलसी व्यक्ति के लिए

बैल - काफी परिश्रमी किन्तु मंदः बुद्धि वालों के लिए

हाथी - भारी-भरकम, मोट्-झों शरीर वालों के लिए

खच्चर - झगड़ालू, किसी की इज्जत का ख्याल न करने वाला

गदःहा - गदःहा मंदःबुद्धि का परिश्रमी

पाड़ा - लंठ, मो बुद्धिवाला

घोड़ा - परिश्रमी किन्तु अकड़ने वाले व्यक्ति के लिए

ऊँ - लंब-धडंग, दःुबले-पतले, ऊँपर दःेखकर चलने वाले व्यक्ति के लिए

कुत्ता - लालची, घर-ढूँ प्रवृत्ति, झीट्-झप कर खाने वाले व्यक्ति के लिए (उपेक्षा-भाव में मुहावरा - "नाम पर कुत्ता पोसल')

बिलार - प्रत्यक्ष में स्नेहिल एवं विनम्र किन्तु परोक्ष में चतुर, बुद्धिमान प्राणी के लिए

खेंखर - दःंत-चिआर, हँसोड़ व्यक्ति के लिए

खेंखर-बिलार - चारो ओर से उपेक्षा, डाँट्-फट्कार, सहने रहने वाले व्यक्ति के लिए (खेंखर-बिलार के दःसा)

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कीड़े-मकोड़े- संबन्धी

गेहुँन - अत्यन्त क्रोधी, असहनशील, तन कर उठ खड़ा होने वाले व्यक्ति के लिए

करैत - अत्यन्त कटु-भाषी, क्रोधी व्यक्ति के लिए

अजगर - भुक्कड़ तथा आलसी के लिए

हड्डी-बिरनी - थोड़ी सी प्रतिकूल बात पर भी नोच खानेे वाली मनोवृत्ति हेतु

मच्छ्ड़ - शोषक, कायर, कमजोर स्वभाव के लिए

माछ्ी - किसी बने हुए काम में अचानक विध्न उपस्थित हो जाने पर, जिससे उसे न छ्ोड़ा बने न किया ही बने, तब कहा जाता है - "दःूध में माछ्ी पड़ गइल'

गो - समृद्ध-संपन्न के लिए, जिसका कु नुकसान भी हो जाय तो कोई फर्क नही - "गो की टांग'

गोबरौरा - गं ढ़ग से, गंदःगी में रहने वालों के लिए "गोबर का कीड़ा' या "गोबरौरा' प्रयुक्त होता हैं।

गन्हवा - कोई ऐसी बात, या प्रसंग अथावा व्यक्ति, जिसकी वजह से बना बनाया काम बिगड़ जाय, तब कहा जाता है - "वही "गन्हवा' बन गया, नही तो काम हो जाता।

पतिंगा - भावावेष में कोई अनर्थ कर बैठने या व्यर्थ के झंझ में पड़ जाने वाले व्यक्ति के लिए कहा जाता है- "पतिंगा की तरह आग में कूदः गइल।

चिलर - किसी सामान्य सी बात पर हिल्ला-हुज्जत करने की स्थिति में "चिलर का चह तुरना' कहा जाता है

चिंउटा - कोई वजनी या भारी सामान उठाने, कोई विशिष्ट कार्य के लिए तन मन से भिड़ने के लिए "चिंउटा के तरह भिड़ल' कहा जाता है।

छुछुन्दःर - जिसमें गंभीरता न हो और चाल-चलन ठीक न हो।

घून - कुसंगति अस्थिर, गंभीर न रहने वाले दःरिद्र मनोवृत्ति के व्यक्ति के लिए गेहूँ के साथ घून का पिसा जाना कहा जाता है।

खोभार - वह घर जिसमें सुअर रहते हैं।

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शब्दः-संरचना

"हार' (= वाला)

- खइनीहार = खाने वाला

- दःुहनियार = दःूहने वाला

- सोहनियार = सोहनी करने वाला

- बनिहार = मजदःूरी करने वाला

- मनिहार = मणिमाला बेंचने वाला

 

"वाह' (= वाला)

- हरवाह = हल चलाने वाला

- चरवाह = पशु चराने वाला

- घसवाह = घास काट्ने वाला

- कुदःरवाह = कुदःाल चलाने वाला

 

"अई'- (किसी क्रिया की अधिकता में)

- जबरई = जबर्दःस्ती

- लबरई = झूठा

- खइनई = खूब खाना-पीना

 

"वहिया'

- घोड़+ वहिया = घोड़ा पर माल लाद कर व्यापार करने वाला

- पड़+ वहिया = भैंस पड़ का व्यापार करने वाला

- जल+ वहिया = नाव से व्यापार करने वाला

"कू'

- इस प्रत्यय से बना शब्द प्रायः दिखावा के अर्थ में होता है और इसमें व्यंग्य छुपा रहता है।
- लड़ाकू = लड़ने वाला
- पढ़ाकू = पढ़ने वाला

"हा' - (वाले)

- डेरहा - डेरावाले

- दिअरहा - दिआरा वाले

- परहा - पार वाले

- खेतहा - खेत वाले

- बनहा - वन में रहने वाले "बनेया'

- बेट्हा - वर पक्ष से बेटा वाले

- कट्हा - काट्ने वाले (कुत्ता,बन्दःर)

- घट्हा - घा वाले नाव

- जट्हा - जटा-जू वाले साधु, बच्चा

- फट्हा - मुँहफ

- पगहा - पैदःल यात्री, रस्सी

- पनहा - पानी में रहने वाला सपं, जूता

- पतहा - पत्ता वाला फसल या स्थान

- भरहा - भार ढ्ोने वाले वाले कहार

- हरहा - हरकाह जीव (गिलहरी, खरगोस, कौवा आदि)

- चरहा - चारागाह, चरने वाले पशु, चरवाह

"गर' - (अधिकता सूचक)

- गलगर - गाल बजाने वाला

- मुँहगर - अधिक बोलने वाला

- लुरगर = ढ्ंग से

- दःुधगर = दःुधा

- नूनगर = अधिक नमीकन

- छ्रगर = छ्रहरा

- जोरगर = बलशाली

- सनगर = तेज

- पनिगर = तंज (बैल)

- पसगर = सही अंदःाज से

- खनगर = निमन, अच्छा

"वान' -

- धनवान, कोचवान, गाड़ीवान, पहलवान, पिलवान, बलवान, भगवान

" मातर'- अर्थ-ही

- दःेखते मातर = दःेखते ही

- कहते मातर = कहते ही

- खाते मातर = खाते ही

- जाते मातर = जाते ही

- छूते मातर = छूते ही

 

"आह' -

- सनक + आह = सनकाह

- बिख + आह = बिखिआह

- खिस + आह = खिसिआह

- लत + आह = लताह

- पे + आह = पेटाह

- ने + आह = नेटाह

- ट्ें + आह = ट्ेंटाह

- ढ्ेल + आह = ढ्ेलाह

 

"वैया' -

- दःेखवैआ, खवैआ, गवैआ, जलवैआ

 

"लेखाँ' - (= की तरह)

- सूअर लेखां - पटाइल बा

- कुकुर लेखां - भोंकऽता

- कुम्हकरन लेखा - सुतल बा

 

"चाके' - (= सा) -

- नखी चाके = छ्ोटा सा

- हेती चाके = छ्ोटा सा

 

"से' -

- ख से - खड़ा

- ग से - निगल गया

- च से - दःाव मारल

- झ से - भागल

- प से - टूट्ल

- फ से - आवाज

- ट्प से - चू गइल

"दःे' -

- धांय - गोली लागल

- कांय - क के मर गइल

- टांय - बोललख, मरलख

- चांय - चिचिआइल

- छांय - जल गईला

- भांय - चिल्लईलऽस

- सांय - गोली निकल गइल

- ठांय - जबाब दःेहलख

 

"भर' -

- हाथ भर = एक हाथ का

- दःाम भर = दःाम भर का

- दिन भर = पूरा दिन

- पे भर = भर पे

- इच्छा भर

- जोर भर

- बलभर

- पलभर

 

"ही' -

- गदःही

- नदःही

- कट्ही

- घट्ही

- चट्ही

- जट्ही

- झट्ही

- ट्ट्ही

- नट्ही

- पट्ही

- मट्ही

- लट्ही

- चोट्ही

- झोंट्ही

- टोट्ही

- टुट्ही

- पकही

- भगही

- संगही

- सोगही

- केंगही - केंघी

 

"गार' -

- लगार = पुरकस

- पगार = भोजनोपरान्त, गाय-भैस के आगे डाला गया चारा, बोनस

- कगार = किनारा

- बेगार = बिना मन, मजदःूरी के कार्य (बैठल से बेगार भला)

- घेघार = घेघ वाला

- डेगार = झड़क कर

- छ्गिार = छ्ट्-पुट्, झांझर

- निगार = बदःला

- बिगार = झगड़ा

- जुगार = इन्तजाम

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वस्तु-स्थान

मकरा - जाल

मध - छाता

बिरनी - खोंता

माटा - थोक, खोंता

चिरई - घोंसला

सियार - मान

चूहा, साँप - बिअल

गो - घारी

सुअर - खोभार

हाथी - हथिसार

घोड़ा - घोड़सार

छ्ोटाघर - दःरबा

हार - चिड़ियों का

झुण्ड - पशुओं का

जमात - साधुओं का

पांत - भोजन करने वालों का

भीड़ - मनुष्यों की

बिछ्ी - "ट्ं' से मारल "डंक'

बिरनी - लबध लेहलख

कुत्ता - भंभोर लेहलख

बाघ - छ्छ्ोर लेहलख

गाय - ढाही मरलख

बैल - हुरपेट्लस

घोड़ा - लतिअवलस

हेव - मवेशी (रोकने के लिए)

गत - हाथी (आगे बढाने हेतु)

दःूर - कुत्ता (भगाने के लिए)

हेल - पशु (पानी में पौड़ाने के लिए)

हट् - पशु (पानी के बाहर आगे बढ़ने के लिए)

 

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उपमान शब्द

- आँख पर बुझाऽता कि भंवरा गुजरता

- भंवरा खानी केस

- अंजोरिया धरम के रात

- बंसुरी के त नाक

- आँख पर बुझाता कि भंवरा गुजरऽता

- आम के फांक एहिसन आँख

- आँख छ्ीलल लीची

- आँख उलथ-उलथ (बड़ा-बड़ा) बा

- आँख हेती-हेती (छ्ोट्-छ्ोट्) बा

- आँख के कोन ह कि कटारी के कोर?

- का के धार ह कि फींकी तलवार?

- बंसुरी त नाक, छूरी लेखा नाक

- सुगा के ठोर एहिसन नाक

- नाक चीलम जइसन

- ओठ ह कि कतरल पान!

- मूस के पों एहिसन मांे

- मों ह कि बिछ्ी के डंक

- दःाँत बुझाऽता कि मीसी बइठावे लायक बा

- करिया झंावर

- करिया भुचेंग, कौअवा गोराई

- करिया कुचकुच छ्पले बा, अन्हार कूप

- कर्हाई के पेनी लेखा करिआ

- अंजोरिया धरम के रात, भींगल रात

- ट्हांट्ह अंजोरिया

- कचमच गदःबेर

- लहालह दःुपहरिया

- गोड़ के फुट्हा हो गइल, भुट््टा हो गइल

- जरनिआह घाम, कड़ा दःुपहरिया

- बालू धिक के आगी भइलइ बा

- लाल भभूका

- लाल टुह-टुह, लाल ट्ेस

- पियर दःब-दःब

- पाक के मध, मधुबन, चीनी झूठ, मिश्री लेखा

- पियर बुंद (खूब पका हुआ)

- चाबूक खानी दःेह

- रोशायन दःेह

- सूख के अमचूर

- सीसा खानी दःेह चमचम

- सूख के खटाई

- सूखके झांवर

- सूख के संठी

- सूख के लकड़ी

- करेज सूख के छ्ोहड़ा

- भर पंजा के दःेह

- भर खट्यिा के चौख खानी दःेह

- एकदःम पियर कल्हा (बहुत कमजोर)

- ढ्कचल पिली

- खुंटा लेखा खड़ा

- दिवाल खानी खड़ा

- सूख के गतान

- बुढ़ा के पंचर

- लट्क गइले

- चोखा रंग

- चाल हिरनी के

- ब बहिर

- मुँह-चुहाड़ जइसन

- कवनो गत के ना

- कान जनकपुर के झाल

- मुँह सतहवा

- फहाफह ऊँ

- बगूला के पांख लेखां उ

- चरक लेखां उ

- गोर कपील

- आँख नइखे ठहरत (खूब चमकदःार)

- अन्हार घर के ट्ेमरोशन (काफी गौरवर्ण रोशनायन, गुणवन्ती, प्रसन्न करने वाली)

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अपशब्दः/उलाहना

- राख लगा के जीभ खींच लेब

- तर-उपर लाठी ध के जांत दःेब

- कवना तंत के हईं जानत नइखू! भूजा सभऽतर भुजाई, लेकिन भरवा हमहीं दःेब

- हमहीं सिखाएब

- सोझे दःुआरी आगी लगा के फूंक दःेब

- बाती छ्ट्का दःेब

- गड़ाए गइल बा

- तोपाए गइल बा

- मुआ के बरम्ह पुजेब

- मांग में आगिए जोर दःेब

- मों उख़ाड लेब

- ट्ेढ़ होके चलबे त डैने अइंठ दःेब

- करिखही हा़ॅडी से मारेब

- चूल्हिए में जोर दःेब

- जीभ खींच लेब

- खत का लेब

- बोकला छ्ोड़ा दःेब

- छाल खींच लेब

- उमकल छ्ोड़ा दःेब

- घें अइंठ दःेब

- लो ढ्रका दःेब

- नट्यिे अइंठ दःेब

- बरम्हाड़े फोर दःेब

- लाद फार दःेब

- ट्ंगरी चीर दःेब

- रान फार दःेब

- नाल ठोक दःेब

- भुभुन फोर दःेब

- घघेली जांत दःेब

- खान दःेब

- पां छ्ट्का दःेब

- बाती तूर दःेब

- बाई मरले बा?

- लकवा मरले बा?

- बीख मत हगऽ

- बीख मत पादःऽ

- बीख मत ढ्ीलऽ, ना तऽ

- लसार-लसार के मारेब

- दःाँत लगा-लगा के मारेब

- लुआठी खालेऽ

- घरी-घरी खेपऽतानी

- तहार घरी निअराताऽ

- हम हाथे लिखऽता

- बइठल विषकुल्ला कइले बा

- ठुसुर-ठसुर करऽ ता

- बड़ा अगराइल बाड़ी

- धधा गइल बा

- अपना के धनुकाइन भइल बाड़ी

- बड़ा चोना करऽ तारी

- नव जाने ली छ्व ना जाने ली

- बड़ा खेलाड़ी बिआ

- ओकर बात सुनते दःेह में आग लग गइल

- तोरा दःादःा के हाड़ में कबड्डी खेलाईं

- गरजऽ मत

- तोरा उफर परो

- कीरा परो

- तोरा मुँह में फूला परो

- कोढ़ फुटो

- मरकी लागो

- ब परो

- खलर परो

- आग लागो

- जरो धनको

- तोरा माट्ी लागो

- काया में घून लागो

- चुआती लागो

- पे बिहंस जाइत = फा जाइत (पेट्क्कड़ों पर व्यंग्य)

- बढ़नी लागल बा = विपत्ति

- अनसोहातो = बिना बात के

- रहनदःारी =

- लोर ट्प-ट्प गिरत र

- पूल जइसन दःेह

- फूल के कुप्पा = गभुआइल

- लाटा लगावे ले

- खिसिए के अंगार

- एगो खल के बाड़े

- उनचास हाथ के अंतरी बा

- इनकर थाह लगावे वाला केहू नइखे

- बसवा दःेहले

- बेट्ी भसा दःेहले

- बेट्ी बिआह दःेहले कुइयाँ उदःह दःेहले

- नीच-ऊँच नइखन बूझत

- हाथ दःुमावत गइले हाथ दःुमावत अइले

- ओकरा पा के हो गइल ना तऽ----

- घीनाऽ दःेहले

- खड़े इज्जत लेवे वाला बा

- खीं-खीं खीं-खीं दःाँत मत चिआरऽ

- तेजी दःेखावऽ ता

- अपने मन निमन भइल बाड़े

- बढ़नी मारो इनका चाल सुभाव के

- भल बाड़ऽ हो

- ओकरा पसंगों में नइखन

- दिमाग में हर घरी गारिये छ्पले बा

- लाख कहीं तनिको असर ना परी

- ह गुन गाईं त ओतने, फोदः दःेखाईं त ओतने

- तू जवन करऽ तारऽ तवन ठीके बा

- एक दिन रोवे के आँख ना जूरी

- छ्ोड़ऽ हटावऽ जाए दःऽ

- नीच के संग नीच ना बने के

- चोना करऽ तारी

- झमकल बाड़ी

- अगराइल बाड़ी

- भवचर जानऽ तारी

- चौरासी भरमऽ तारी

- अपना में लगावत नइखी

- लौका बिजली भइल बाड़ी

- कसहा थरिया खानि गनगनाइल बाड़ी

- बड़ा वरनकल बाड़ी

- बिरिनिआइल बाड़ी

- हम त अपने छ्तीसा हईं, हमरा के जन पढ़ावऽ

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आशीर्वाद / अभिवादःन

लखिया होखऽ, बाछ्ी हमार जीअस, सात भाई के बड़ होखऽ, जीअऽ, खुश रहऽ, आबादः रहऽ, बनल रहऽ, मोटाऽ, बुलन्द रहऽ, मस्त रहऽ, चिरंजीवी, एक से एकइस होखऽ, पा लागीं (पंडित जी), दःण्डवत (साधु बाबा), सलाम (बाबू साहेब), आदःाब (मौलबी साहेब), जय रामजी की (समधी जी), गोड़ लागिले (पंडित जी)

अविधामूलक सामासिक शब्द

अहल - दीहल

अमला - फैला

अजार - बाजार

अंट् - सं

अल - बल

अप - जस

अलग - बिलग

अन्हरिया - अंजोरिया

आसन - डासन

आरी - कगरी

आदःमी - जन

आहते - आहते

आपन - आन

आगे - पी

आपन - पराया

आदःर - सतकार

आर - डरेर

आइल - गइल

ओरी - ओरवानी

ओढ़ना - बिछ्ौना

ओखर - मूसर

ओझा - गुनी

ओरिये - खोरिये

ऊँच - नीच

उतिम - मधिम

उल्टा - पलती

उगहन - बाल्ट्ी

कमाइल - धमाइल

कर - धर

कइल - धइल

कपड़ा - लाता

क - घ

करज - उआम

कठ - कोआ

केंठी - माला

कले - कले

काट् - कू

काना - फूसी

कान्हा - कांखी

कान - कनैठी

कीच - कांच

किन - किन

कुट्वन - पिसवन

टूट्ल - पिसल

कोठा - अमारी

इजत - बरोह

इजत - पानी

कनिया - बहुरिया

कुसल - छ्ेम

कोला - कोलाई

कांच - पाकल

काम - काज

कह - सुन

कुहुक - कुहुक

कुसल - मंगल

करता - धरता

कूंची - बढ़नी

ककही - थकरी

कीन - बेसह

कल - कराह

कल - बल

खुटुर - खुटुर

खीस - पीत

खरची - कलेवा

खदःर - बदःर

खने - खने

खर - खदःुका

खर - मुसली

खच - खच

खाइल - पिअल

खखड़ल - मखड़ल

खींचा - तानी

खोज - खाज

खा - पी

खेत - खलिहान

खोल - खाल

खुदी - चूनी

खेत - कियारी

खीं खीं - खीं खीं

खादः - पानी

गारी - फकरी

गाजा - बाजा

गांव - गवईं

गाँवां - गाईं

गने - गने

गुल - गुल

गचा - गच

गल - गों

गुजुर - गुजुर

गींज - गांज

गुदःर - गुदःरी

गोला - गोदःाम

गट् - ग

गत - गत

गार - गुर

गोदःा - गोदी

गाँव - जवार

गाँव - नगर

गाय - गो

गाली - फक्कड़

गाछ् - बिरि

गाना - बजाना

गरीब - गुरबा

गोबर - गोथार

गोतिन - पड़ोसिन

गहना - गुरिया

घट्ल - बढ़ल

घर - बन

घोर - घार

घर - दःुआर

घास - पात

घाट् - बाढ़

घर - गृहस्थी

घूस - घास

घूसा - मुक्की

घसीट् - फसी

घट्र - घट्र

घाम - बेआर

चूमा - चाट्ी

चूप - चाप

चोर - चुहाड़

चिकन - चाकन

चिंता - फिकिर

चाल - ढाल

चीर - फार

चमक - दःमक

चर - चुर

चोट् - मोच

चउकठ - केवारी

चबर - चबर

चोप - चोपाह

चिरकुट् - मिरकु

चीर - फाड़

चूड़ी - लहठी

छ्ल - कप

छ्ोह - नोह

छाँट् - छूँ

छुआ - छूत

छ्ेर - छार

छ्ेरल - पोंकल

छ्ीन - झप

छूट्ल - भट्कल

छूरा - छूरी

छ्ोट् - बड़

छ्हर - छ्हर

छ्ट् - पु

छाँट् - छाँ

छ्ेंका - छ्ंूकी

जोग - टोन

जग - परोजन

जादःू - टोना

जरना - काठी

जहाँ - तहाँ

जगह - जमीन

जर - जजाद

जग - जूप

जाँच - परताल

जिया - जानवर

जाड़ - ठाढ़

जोर - गांठ

जन्तर - मन्तर

जर - बोखार

जनम - करम

जड़ी - बूट्ी

जाड़ा - पाला

जात - बेरादःर

जोत - जात

जस - जस

झाड़ - फूंक

झगरा - तकरार

झिन - झिन

झुन - झुना

झिहिर - झिहिर

झर - झर

झट् - प

झिल - मिल

झोंटा - झोंट्ी

झगड़ा - झंझ

झील - झक्कड़

झिसी - फूसी

तय - तपड़ा

तियन - तरकारी

तेल - तासन

तड़पा - तड़पा

ताल - तलैया

तीज - त्यौहार

थर - थर

थोड़ा - बहुत

थोर - थार

दःेह - नेह

दःेसा - दःेसी

दःूर - दःराज

दःया - माया

दिया - बाती

दःवा - दःा

दःया - माया

दःेवता - पीतर

दःउर - धूप

दःूर - दःूर

दःर - दःर

दःु:ख - सुख

दीन - दःुखिया

दःान - पुन

दःान - दःहेज

दःाँवल - पीसल

दःउरी - मउनी

दिना - दिरीठ

दःेसक - दःूर

धीया - पूता

धनी - मानी

धी - धी

धक्का - मुक्की

धर - पकड़

धी - दःामाद

नीमन - बेजाय

नइहर - ससुरा

निघ - निघ

नेम - ट्ेम

नून - तेल

नात - नतउर

नीप - पोत

न - गु

नाद - घोठा

नदी - नाला

नींच - ऊँच

नगर - बिसराम

नेह - छ्ोह

नार - खोर

नाचल - कूदःल

नाप - जोख

पुर्रूबा - साख

पुरखा - पुरनिया

पूआ - पूड़ी

पइसा - कउड़ी

पौनी - पसारी

पउआ - पाट्ी

पट्ी - पट्दिःार

परसो - नरसो

पुल - पुल

पन - कोआ

पी - पी

पोर - पोर

पी - पा

पट्र - पट्र

पइंचा - उधारी

पइसा - ढ्ेबुआ

पट्का - पट्की

पुरान - धुरान

पी - पी

पूजा - पाठ

परती - परात

पथल - पखान

पास - पड़ोस

पोथी - पतरा

पाड़ा - पाड़ी

फूल - खांड

फर - फरहरी

फूल - पट््टा

फाट्ल - पुरान

फेरा - फेरी

फूस - फास

फूंक - फांक

बर - बट्ैया

बान्ह - बून्ह

बाचल - खूचल

बहार - सोहार

ब - ब

बूढ़ - पुरनिया

बरतन - बासन

बन - बनिहारी

बो - बा

बाल - बच्चा

बासन - डासन

बारी - कुँआरी

बाग - बगीचा

बेर्ही - बखार

बां - चों

बोली - बकार

बरखा - बूनी

बापे - पूते

बकरी - छ्ेर

बनिया - बेकार

बएल - बधिया

भुलाइल - भट्कल

भुइया - भुपाल

भूखा - दःुखा

भोला - भाला

भुकुर - भुकुर

भादःो - भदःवार

भदःा - भद

भूल - चूक

भाई - भउजाई

भरम - भट्का

भनर - भनर

भुखल - पिआसल

मों - झों

मोल - जोल

माल - गो

मेला - ठेला

मोह - माया

मार - पी

मइल - कुचइल

मारा - मारी

माई - बहिनी

मांड़ - भात

मालिक - मुखतार

मरन - जिअन

मछ्री - मांस

मांज - मुंज

मनई - मजदःूर

मार - का

टोना - ट्ट्का

टाँय - टाँय

टापा - टोइया

टोला - ट्परी

टा - पलानी

ट्के - ट्के

ठांवे - ठांव

ठूस - ठूस

ठाँव - चउका

ठा - बा

ठोकल - ठेठावल

डर - भय

डरावल - धमकावल

डार - पात

डाँड़ - मेड़

ढ्ेंकी - जांत

ढ्हल - ढ्मिलाइल

रंडी - भंड़ु़आ

रोज - रोज

रोआ - रोह

रोआ - कानी

राज - पा

रगरा - रगरी

राही - बटोही

रास्ता - पें

लूर - ढ्ंग

लप - चप

लसर - लसर

लोग - बाग

लूगा - झूला

लेवा - गुदःरा

लूला - लँगड़ा

लड़िका - फड़िका

लोटा - डोरी

लात - मुक्का

लात - जूता

लाज - हया

लाज - सरम

लौना - लकड़ी

लाता - लाती

लनर - बनर

सेवा - ट्हल

सुतल - बइठल

सुआ - सुतारी

समझावत - बुझावल

साव - हाकिम

सुखार - दःहार

सुखल - पाकल

सहर - सहर

संउसे - संउसे

सटा - स

सुरखी - लहठी

समझ - बूझ

सास - ननद

सास - ससुर

सोर - सराबा

साँझ - बिहान

संझा - पराती

साथ - संगत

सुखले - सुखल

सानी - पानी

सतुआ - बरुँआ

सतुआ - भूंजा

सिंह - ठाकुर

हवा - बेयार

हल्ला - गुल्ला

हाड़ - गोड़

हाड़ - मांस

हड् - बिरनी

हरदी - चूना

हाथी - हथिसार

हाव - भाव

हफर - हफर

हारल - थाकल

हिस्सा - बखरा

हिस्सा - पताई

हँसी - मजाक

हिसाब - किताब

हरबा - हथियार

हिलावल - डुंलावल