टी डी आई एल
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टी डी आई एल के लिए संदेश

प्रधानमंत्री का सन्देश - मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इलैक्टॉनिक्स विभाग अपनी वेबसाइट 'विश्वभारत' आरंभ कर रहा है जिसमें उपलब्ध भारतीय भाषा प्रौद्योगिकीयों पर सूचना उपलब्ध रहेगी। सूचना टेक्नॉलोजी पर राष्ट्रीय कार्यबल ने 'सब के लिए ज्ञान' सुनिचित करने के लिए कुछ सिफारिशें की हैं। भारत जैसे बहु-भाषी देश में हमें भाषा अवरोधों के बिना संचार का विकास और प्रयोग करना है। विश्वभारत उस दिशा में एक चरण है। मैं इलेक्टानिक्स विभाग के लिए सफलता की कामना करता हूं।

सचिव (राजभाषा विभाग) : उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध टी डी आई एल प्रोग्राम के उत्पादन के लिए डी ओ ई के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि गत 50 वर्षों में किए गए विभिन्न प्रयासों का वह अध्ययन कर रहे हैं और निर्णय लेने वाले स्तरों पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से वे चर्चा कर रहे हैं ताकि हिन्दी को विचारों के आदान-प्रदान और संचार का एक लोकप्रिय साधन बनाया जा सके। उन्होंने राय व्यक्त की कि उपलब्ध सहायक साधन अत्यन्त प्रारंभिक चरण में हैं जैसाकि अनुवाद-सहायक साधन। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि निकट भविष्य में मानव अनुवादको को टूल्स उपलब्ध कराए जाए जो गुणता और चाल में महत्वपूर्ण सुधार करें और भाषा को समृद्ध बनाएं। बैंक क्षेत्र में आई एल टूल्स की अनुप्रयोग की गुंजाइश की रूपरेखा भी उन्होंने प्रस्तुत की। उन्होंने टी डी आई एल के प्रयासों की श्लाधा की और आशा की कि यह प्रेरक-शक्ति भविष्य में बनी रहेगी।

सचिव इलैक्टॉनिक्स का सन्देश :- अगली सहस्त्राब्धि में राष्ट्रीय श्रेष्ठता मानव संसाधनों के लघुत्तम और संबंधित समाज के ज्ञान आधार से निर्धारित की जाएगी। ज्ञान के अर्जन, समावेश और संचार को सरल बनाते हुए ज्ञान के अन्तर को घटाने/समाप्त करने में सूचना टेक्नालोजी एक समर्थ टूल के रूप में प्रकट हुई है। भारत में अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों की संख्या 5 प्रतिशत से कम है इसलिए यहां भाषा अवरोधों को पार करने की भी आवयकता है। तीव्र आर्थिक विकास के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में 'सब के लिए ज्ञान' और 'ज्ञान श्रृंखला पर ऊपर चढ़ना' शामिल होनी चाहिए। टी डी आई एल (भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकीय विकास) के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत, भारतीय भाषा प्रोसेसिंग टूल्स, मानव-माशीन इंटर्फ़ेश सिस्टमों, अनुवाद सर्पोट सिस्टमों, कार्पोरा और कोश-विषयक संसंधानों के क्षेत्र में कई प्रॉजेक्ट समर्थित किए गए हैं। ग्लोबल ज्ञान को काम में लाने और स्थानीय ज्ञान उत्पन्न करने और लोगों के व्यापक हित में ज्ञान को वरणात्मक रूप से लोक-जन क्षेत्र में रखने और संचार की प्रभावकता में सुधार करने के लिए सतत प्रयासों की ज़रूरते है। बाज़ार प्रोत्साहनों के माध्यम से हमें निजी क्षेत्र को भी प्रेरित करना है कि इस क्रांतिक क्षेत्र में वे योगदान दें।वेबसाइट http://vishwabharat.tdil.gov.in में अब तक तैयार भारतीय प्रौद्योगिकी और लोकजन क्षेत्र में बेसिक साफ़्टवेयर और फोंटस उपलब्ध हैं। मुझे आशा है कि यह वेबसाइट कुल मिलाकर लोगों, अनुसन्धान कर्त्ताओं और IT स्थानीयकरण सालूशन उपलब्ध कर्त्ताओ के लिए लाभप्रद होगी और सहयोगी विकासों के साथ बढ़ती रहेगी।

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