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यदि किसी समाज के लोग कंप्यूटर के साथ अपनी भाषा में संपर्क स्थापित कर सकते हों तो वह समाज सूचना प्रौद्योगिकी से बड़े पैमाने पर लाभान्वित हो सकता है । प्राकृतिक भाषा संसाधन (एनएलपी) शोध का वह क्षेत्र है जो इन मुद्दों की दिशा में कार्य करता है ।एनएलपी अभिकल्पना मॉडलिंग, और विभिन्न प्रकार की ऐसी प्रणालियों के डिजाइन तथा विकास के कार्य से संबंधित है जिनसे मानव कंप्यूटर संचार हो सकता है । चूँकि अधिकांश संचार भाषा के लिखित अथवा मौखिक रूप में होता है, अतः एनएलपी की प्राथमिकता लिखित अथवा उच्चरित शब्दों को पहचानने की है ।इसमें ऐसी प्रणाली का विकास शामिल है जो भाषा के उपर्युक्त स्वरूप को समझ सके । इस प्रकार एनएलपी डेटाबेसों, कम्प्यूटरों को प्राकृतिक भाषाइंटरफेस प्रदान करता है, भाषागत शोध कार्यों के लिए मशीनी अनुवाद, प्रकाशिक अक्षर पहचान, वाक् से पाठ और पाठ से वाक् में परिवर्तन आदि के लिए साधन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है । भारतीय प्रसंग में एनएलपी को भारतीय भाषा संसाधन (आईएलपी) कहा जा सकता है ।

भारतीय भाषा संसाधन (आईएलपी) के लिए विशिष्ट आवश्यकताएं




भारत एक विशाल बहुभाषी देश है जिसमें अँग्रेजी और राष्ट्र भाषा हिंदी सहिंत 18 भाषाओं को संविंधान में मान्यता प्रदान की गई हैर् इन भाषाओं की लिंपिंयां भी अलग-अलग हैं । देशभर में व्यापार और विकास की प्रगतिं होने के कारण व्यक्तिंयों के लिंए एक से अधिंक भाषाओं में संपर्क करना आवयक हो गया है । इन परिस्थितिंयों में यह प्रतीत होता है किं सूचना प्रौद्योगिंकी (आईटी) ही आईएलपी प्रणालियों के विकास के लिए सुनिचित साधन होगा जिसका लक्ष्य भाषाई अवरोधों को दूर करना है ।ये आईएलपी साधन निम्नलिखित विधियों का प्रयोग करके तैयार किए जा सकते हैं, यथा :

  •  डेटा आगत/निर्गत पोषण के लिए प्राकृतिक भाषाइंटरफेस/परिवेश

  •  भारतीय भाषाओं के लिए स्थानीय स्तर पर प्रचालन प्रणाली स्तर की सहायता

  •  विद्यमान प्रचालन प्रणाली और अनुप्रयोगों के लिए भारतीय भाषा आवरण

  •  विद्यमान अनुप्रयोगों का स्थानीयकरण

  •  विशिष्ट अनुप्रयोगों का विकास करना

  •  प्राकृतिक भाषाओं में भाषा कम्पाइलर तैयार करना
     


    भारत में आईएलपी शोध




              जिस्ट प्रौद्योगिकी का विकास बहुत बड़ी उपलब्धि थी, जिससे भारतीय भाषाओं में डेटा की प्रविष्टि, संसाधन और देखना संभव हुआ है । भाषाई अवरोधों को दूर करने में भारतीय भाषाओं में सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार ने वर्र्ष 1991 में भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम शुरू किया, इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भाषा संसाधन के लिए आईटी साधनों का विकास करना, मानव मशीन संपर्क को सरल बनाना, विभिन्न भारतीय भाषाओं के अध्ययन और शोध कार्यों में आईटी साधनों को बढ़ावा देना और भारतीय भाषाओं में सूचना संसाधन में अनुसंधान तथा विकास के प्रयासों को बढ़ावा देना है ।इसके पूर्व एमआईटी ने टीडीसी जैसे अन्य कार्यक्रमों ज्ञान आधारित कंप्यूटर प्रणाली का विकास (केबीसीएस) और प्रौद्योगिकी विकास परिषद के जरिए भारतीय भाषाओं के प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दिया ।


    चुने गए प्रमुख क्षेत्र




  •  भारतीय भाषा संसाधन/बोधगम्य प्रणाली

  •  भारतीय भाषा संसाधन साधन

  •  अनुवाद सहायता प्रणाली

  •  मानव मशीनइंटरफेस प्रणाली (वाक् एवं दृश्य)

  •  लोकप्रिय मीडिया में भारतीय भाषा इंटरफेस के जरिए राष्ट्रीय एकीकरण
     

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